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अब्दुल्लाह योल्चु

मैथिली विकिपिडियासँ, एक मुक्त विश्वकोश
अब्दुल्लाह योल्चु
Abdullah Yolcu
जन्म१९५८
इराक (वर्तमानमे तुर्कीमे सक्रिय)
राष्ट्रियतातुर्की (तुर्क)
अन्य नामसभअब्दुल्लाह बिन अब्दुल हमीद अल-अथरी
व्यवसायइस्लामी विद्वान, लेखक, उपदेशक
प्रसिद्धि कारणइस्लामी अकीदा (عقيدة) आ अथरी विचारधारा पर महत्त्वपूर्ण कार्य
शीर्षकशेख

अब्दुल्लाह योल्चु (तुर्की: Abdullah Yolcu), जिनका अरब आ इस्लामी जगतमे हुनक साहित्यिक आ विद्वतापूर्ण नाम अब्दुल्लाह बिन अब्दुल हमीद अल-अथरी (अरबी: عبد الله بن عبد الحميد الأثري) केर रूपमे सेहो जानल जाइत अछि, तुर्कीक एकटा प्रमुख समकालीन इस्लामी विद्वान, लेखक आ उपदेशक (दावा कार्यकर्ता) छथि। हुनका मुख्य रूपसँ इस्लामी 'अकीदा' (धार्मिक विश्वास) केर क्षेत्रमे हुनक काज आ 'अथरी' (Athari) वा सलाफी विचारधाराक तुर्कीमे प्रचार-प्रसारक हेतु जानल जाइत छन्हि। ओ तुर्की समाज आ अरब इस्लामी वैचारिक परम्पराक मध्य एकटा महत्त्वपूर्ण बौद्धिक कड़ी मानल जाइत छथि आ दुनू भाषामे हुनक असंख्य अनुयायी छन्हि।

प्रारम्भिक जीवन आ वैचारिक पृष्ठभूमि

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अब्दुल्लाह योल्चु (अल-अथरी) केर जन्म आ प्रारम्भिक विकास एहन दौरमे भेल जखन इस्लामी जगत कतेको राजनीतिक आ धार्मिक परिवर्तनसँ गुजरि रहल छल। ओ प्रारम्भसँ हि पारम्परिक इस्लामी शिक्षा प्राप्त करबामे गहन रुचि प्रदर्शित केलन्हि, विशेष रूपसँ तौहीद (एकेश्वरवाद) आ हदीस विज्ञानमे। अरबी साहित्य मे ओ अपन हेतु 'अल-अथरी' उपनाम चुनलन्हि, जाहिक अर्थ अछि 'अथार' (अर्थात पैगम्बर आ हुनक शुरुआती साथी सभक मार्ग) केर कठोरतासँ पालन करनिहार।

हुनक अध्ययन आ विचार ओटोमन (उस्मानी) आ पारम्परिक इस्लामी विरासतसँ व्यापक रूपसँ प्रभावित छल। इतिहासकार एंड्रयू हैमंड (Andrew Hammond) अपन पुस्तक "लेट ओटोमन ओरिजिन्स ऑफ मॉडर्न इस्लामिक थॉट" मे तुर्की आ मिस्रक विचारक लोकनिक मध्य इस्लामी ज्ञानकेँ संरक्षित करबाक जे वैचारिक विमर्श स्थापित केने छथि, अब्दुल्लाह योल्चु केर कार्य ओही ऐतिहासिक आ बौद्धिक सन्दर्भक एकटा महत्त्वपूर्ण हिस्सा अछि। ओ इस्लामी ज्ञानकेँ आधुनिक दार्शनिक मिश्रणसँ दूर रखबाक अनवरत प्रयास केने छथि।[]

तुर्की मे सलाफी आन्दोलन आ प्रभाव

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अब्दुल्लाह योल्चुकेँ आधुनिक तुर्कीमे सलाफी आ अथरी विचारधाराक विकासमे एकटा अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हस्तीक रूपमे देखल जाइत अछि। हालक दशक सभमे तुर्की इस्लामी आन्दोलन सभमे व्यापक विविधता देखल गेल अछि। पत्रकार अदनान आर. खान (Adnan R. Khan) केर अनुसार, तुर्कीमे इस्लामी नीतिक उदय कतेको नव धार्मिक विमर्श सभकेँ जन्म देने अछि, जाहिमे योल्चु जेहन विद्वान लोकनिक दृष्टिकोण सेहो सम्मिलित अछि।[]

योल्चु (अल-अथरी) आ हुनक विचारधारा इण्टरनेटसोशल मीडिया पर एकटा मजबूत उपस्थिति दर्ज केने अछि। "ट्विटर पर तुर्की सलाफीवाद: सोशल नेटवर्क" नामक एकटा शोधमे ई दर्शाओल गेल अछि जे कोना ई नेटवर्क अपन वैचारिक विचार सभकेँ प्रसारित करबाक हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म केर उपयोग करैत अछि, जतय अब्दुल्लाह योल्चु एकटा प्रमुख सन्दर्भ बिन्दु छथि।[]

मुदा, हुनक एहि दृष्टिकोणकेँ लऽ कऽ तुर्कीक भीतर विवाद सेहो रहल अछि। पारम्परिक सूफी आ मातुरीदी (Maturidi) विचारधाराक विद्वान लोकनिक संगे हुनक गहन मतभेद छन्हि। तुर्की लेखक केरेम ओन्डर (Kerem Önder) अपन पुस्तक "गुनुमुज़ कुरान तहरीरफिलेरी" (GÜNÜMÜZ KUR'AN TAHRİFÇİLERİ) मे आधुनिक समयक धार्मिक विवाद सभक उल्लेख करैत अल-अथरी जेहन विद्वान लोकनिक संगे होबयबला तीक्ष्ण वैचारिक बहसक वर्णन केने छथि।[]

अरब जगत मे प्रभाव आ साहित्यिक योगदान

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अब्दुल्लाह योल्चु (अल-अथरी) केर प्रभाव केवल तुर्की धरि सीमित नहि अछि। अरबी भाषा पर हुनक गहन पकड़ आ विद्वत्ताक कारण, ओ अरब जगतमे सेहो उत्कृष्ट ख्याति प्राप्त केने छथि। डॉ. मदावी अल-रशीद (Madawi Al-Rasheed) अपन पुस्तक "सलमांस लिगेसी" मे ट्रान्सनेशनल (सीमा पार) सलाफी नेटवर्क आ हुनक बौद्धिक आदान-प्रदान केर उल्लेख केने छथि, जे ई दर्शावैत अछि जे कोना योल्चु जेहन गैर-अरब विद्वान अरबी धार्मिक परिधि (विशेषकर सउदी अरब) मे अपन सुदृढ़ स्थान स्थापित करैत छथि।[]

हुनक साहित्यिक आ दावाह (प्रचार) कार्य कतेको दशक पुरान अछि। १९८० केर दशकमे हि ओ प्रमुख इस्लामी पत्रिका सभमे लेख लिखि रहल छलाह। १९८८ मे मिस्रक "दार अल-शाब" द्वारा प्रकाशित प्रसिद्ध पत्रिका "लिवा अल-इस्लाम" (Liwa al-Islam) मे हुनक लेख सभक उल्लेख भेटैत अछि।

वर्तमान डिजिटल युगमे, ओ यूट्यूब (YouTube) जेहन प्लेटफॉर्म पर सेहो अत्यधिक सक्रिय छथि, जतय हुनक कतेको वीडियो आ ऑडियो व्याख्यान उपलब्ध अछि। एहि व्याख्यान सभमे ओ कुरआनक व्याख्या, अकीदा आ विभिन्न वैचारिक शंका सभक सप्रमाण निवारण करैत छथि।[][]

कार्यप्रणाली (Methodology)

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योल्चु केर कार्यप्रणाली पूर्णतः कुरआन आ सुन्नत केर प्रत्यक्ष आ शाब्दिक अर्थ सभ पर आधारित अछि। ओ धार्मिक ग्रन्थ सभक दार्शनिक (कलाम) आ प्रतीकात्मक व्याख्या सभक कठोर विरोध करैत छथि। हुनक कतेको पुस्तक 'अल-मकतबा अल-शामेला' (Al-Maktaba al-Shamela) जेहन प्रमुख इस्लामी डिजिटल पुस्तकालय सभमे आइयो वैश्विक स्तर पर शोधकर्ता लोकनिक अध्ययनक हेतु उपलब्ध अछि।

  1. Hammond, Andrew (2022). Late Ottoman Origins of Modern Islamic Thought: Turkish and Egyptian Thinkers on the Disruption of Islamic Knowledge. Cambridge: Cambridge University Press. आइएसबिएन 978-1-009-19950-6. https://www.cambridge.org/core/books/late-ottoman-origins-of-modern-islamic-thought/1E1BC89C5DD136F2F468F4149CB89A16.
  2. Khan, Adnan R. (२८ जुलाई २०१६), "How Turkey became a petri dish for Islamist politics", Maclean's (अङ्ग्रेजीमे), अन्तिम पहुँच ८ मार्च २०२६
  3. "Turkish Salafism on Twitter" (अङ्ग्रेजीमे), अन्तिम पहुँच ८ मार्च २०२६
  4. ÖNDER, Kerem (2018-04-12) (trमे). GÜNÜMÜZ KUR’AN TAHRİFÇİLERİ. Kerem Önder. https://books.google.co.in/books/about/G%C3%9CN%C3%9CM%C3%9CZ_KUR_AN_TAHR%C4%B0F%C3%87%C4%B0LER%C4%B0.html?id=h8jlDwAAQBAJ.
  5. Al-Rasheed, Madawi (2018) (enमे). Salman's Legacy: The Dilemmas of a New Era in Saudi Arabia. Oxford University Press. आइएसबिएन 978-0-19-090174-5. https://books.google.co.in/books?id=Lw4ttAEACAAJ.
  6. ابن الصميدي (२४ जनवरी २०१७), الشيخ عبدالله عبدالحميد الاثري (अरबीमे), अन्तिम पहुँच ८ मार्च २०२६
  7. برنامج الخزانة (३ जनवरी २०१९), الإيمان . حقيقته . خوارمه . نواقضه عند أهل السنة والجماعة-عبد الله الأثرى (अरबीमे), अन्तिम पहुँच ८ मार्च २०२६

बाहरी कड़ी सभ

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