प्रयोगकर्ता:Pankaj Kumar Thakur majhoura/प्रयोगपृष्ठ
वो बचपन अच्छा था ये जवानी हार गई स्कूल के दिन अच्छे थे ये कॉलेज की इंजीनियरिंग मार गई वो मोज मस्ती तो स्कूल की थी जहाँ पहली से ना छोड़ा दसवीं तक का साथ वो स्कूल नहीं परिवार था जहां सब एक दूसरे के लिए मरते थे बिछडने का ना ग़म कोई और खुशी के पल साथ जिया करते थे टिफिन कोई लाता था और खा कोई जाता था पर भूखा कोई ना जाता था फिर युँ निकले दिन और रातें फिर शरुआत कॉलेज कि हुई नऐ दोस्त नया परिवार फिर बनाने जा रहा था अपने दिल को फिर से बहला रहा हूँ वो मोज मस्ती शायद यहाँ भी हो पर यहाँ ना कोई प्यार ना कोई परिवार मतलब से मतलब रखता है यहाँ हर एक इंसान दुनिया मानो मतलबी सी है इसका एहसास कॉलेज मे आकर पता चला फिर सोचा इससे अचछा तो स्कूल था वो छुट्टी की घंटी सुनते ही वो भाग के कमरे से बाहर आना फिर हँसते हँसते दोस्तों से मिल जाना काश वो दोस्त आज भी मिल जाते दिल में फिर से बचपन के फूल खिल जाते… !!!