प्रयोगकर्ता वार्ता:रामेश्वर प्रसाद मण्डल
विचार-बिन्दु जोडीरामेश्वर प्रसाद मण्डलक जन्म मधुबनी जिलाक प्रसिद्ध प्रखण्ड- ‘फुलपरास’क रामनगर पंचायतक अधीनस्त ‘मुशहरनिया’ गाममे 12 जुलाई 1956 ईस्वीमे एक मजदूर किसान परिवारमे भेलैन। बचपनहिमे हिनक माए दिवंगत भऽ गेलखिन जइ कारणेँ लोक हिनका ‘माइटुग्गर’ सेहो कहैन। ई अपन गामक प्राथमिक विद्यालयसँ लोअर प्राइमरी पास कए मध्य विद्यालय बैरियाहीमे नाओं लिखौलैन। ओइ समय मैट्रिक बोर्डे जकाँ मिडिल बोर्डक परीक्षा संचालित होइत रहै, जेकरा कठिन मानल जाइ, मुदा रामेश्वरजी तेकरा अप्पन कठिन परिश्रमक बलेँ प्रथम श्रेणीसँ पास केलैन। आब ई एकगोट तेज छात्रक रूपमे मानल-जानल जाए लगलैथ। मैट्रिक लेल ई श्री सागर सार्वजनिक उच्च विद्यालय, नरहियामे अपन नाओं लिखबौलैन आ छात्रवृत्तिक लऽ कऽ आगूक पढ़ाइ जारी रखलैन। ओहुठाम हिनक अकादमिक कैरियर बहुत नीक रहलैन। शुरुहेँ हिनका वर्गमे प्रथम स्थान प्राप्त होइत रहलैन। जइ कारणेँ विद्यालयक सभ शिक्षकलोकनि हिनका खूब मानैत रहैन। तेतबे नहि, सुयोग्य प्रधानाध्यापक स्व. नागेन्द्र प्र. सिंहजी सेहो हिनका बड़ बेसी पसिन करैत रहैन। सबहक आशीर्वाद हिनका प्राप्त होइत रहलैन। रामेश्वर मण्डलजी 1973 ईस्वीमे मैट्रिक पास केलैन। बोर्डक तात्कालिक अध्यक्ष नागमणिक कार्य-शैलीक कारणेँ तथा कदाचार मुक्त परीक्षाक आयोजनक कारणेँ ओइ साल मात्र 21 प्रतिशत रिजल्ट घोषित कएल गेल छल। केतेको उच्च विद्यालयकेँ तँ शून्यक सामना करए पड़लै। एहना स्थितिमे नरहिया उच्च विद्यालयसँ मात्र साते (07) गोट विद्यार्थी पास भेल छला जइमे रामेश्वर प्रसाद मण्डल सेहो रहैथ। मैट्रिक परीक्षासँ पहिने श्री मण्डलक डेरा (नरहिया) मे भयंकर आगि लागि गेलैन जइमे हिनकर सभ किताब-कॉपी समेत सभकिछु जरि गेल रहैन, मुदा तैयो माने पोथीक अभावोमे ई द्वितीय श्रेणीसँ मैट्रिक पास केलैन। मैट्रिक केलाक बाद निर्मली कॉलेज निर्मली, सहरसा (एच. पी. एस. कॉलेज, निर्मली, सुपौल) मे ई अपन नामांकन करौलैन, जेतएसँ बी.ए. पास केलैन। निर्मली कॉलेजमे सेहो हिनका अकादमिक कैरियर बहुत उत्तम रहलैन। कॉलेजमे वाद-प्रतिवाद कार्यक्रम बरबैर होइत रहै छेलइ। ‘कलम आकि तलवार’मे श्री मण्डलजी ‘कलम’क पक्षसँ विजय प्राप्त केने छला जइसँ ई खूब चर्चित भेला। पुस्तकालयाध्यक्ष श्री रामजी प्रसाद मण्डलजी आ गणितक विभागाध्यक्ष स्व. हनुमान प्रसाद शर्मा (डीन) जी केर सहानुभूति सदिखन हिनका प्राप्त होइत रहलैन। एकबेर कॉलेजमे ‘विज्ञान प्रगति’ प्रतियोगिताक आयोजन कएल गेल छल जइमे चारिटा आदर्श पुरस्कारक व्यवस्था कएल गेल छल। समयपर परीक्षाक संचालन भेल आ घोषित समयानुसार पुरस्कारक वितरण सेहो भेल। भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रममे तात्कालिक माननीय एस.डी.ओ., वीरपुर, आर. तिवारी द्वारा हिनका द्वितीय पुरस्कार देल गेलैन। अप्पन घरक दयनीय स्थितिकेँ देखैत स्नातकक पछाइत मण्डलजी होम ट्युशन कए धन-धर्म कमाए लगला। दोस-महिमक सहानुभूति सेहो हिनका प्रति रहै छेलैन। ओही चिरस्मरणीय सहायताक बलेँ ई डबल एम.ए. सेहो केलैन। 1982 ईस्वीमे दर्शनशास्त्रसँ आ 1985 ईस्वीमे अंग्रेजी विषयसँ। तइबीच प्राइवेट कॉलेज किसनीपट्टी, फुलपरासमे कुछ दिन धरि व्याख्याताक पदपर सेहो काज केलैन आ तेकर बाद कर्पूरी नागेश्वर शम्भूनाथ जनता कॉलेज सरौती (घोघरडीहा)मे व्याख्याता- दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष पदपर कार्यरत भेला। तइबीच दू बेर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना द्वारा आयोजित संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षामे सेहो अहर्त्ता प्राप्त केलैन, मुदा अन्तिम सेलेक्शन नहि भेलासँ ई अपन संघर्षशील जीवनसँ भयभीत हुअ लगला। पछाइत उथल-पुथल विचार आ भावक चलैत सामाजिक व्यथा आ सजगतापर लिखबाक दिशामे अग्रसर भेला। मुदा ‘की लिखूँ, लिखि कऽ केकरा देखाबी’ लेखनी तही बीचमे घुरियाकऽ रहि गेलैन। मुदा तैयो हिनकर प्रथम उपन्यास ‘उपवास’ संगी-साथीक बीच बेस चर्चित भेलैन। ‘उपवास’क बाद ‘दूसरी माँ’, ‘ज्योति’, ‘काला भवन’ आदि उपन्यास सेहो संगी-साथीक संग छात्र सबहक बीच प्रशंसनीय भेलैन। सहयोग समय और सही दिशा-गाइडक अभावमे अप्रकाशित रहलैन। 1993 ईस्वीमे बि.लो.से. आयोग, पटना द्वारा चयनित शिक्षक केर सूचीमे सेहो हिनक नाओं एलैन, जे कि बेस कठिन प्रतियोगिता छल। आब ई सहायक शिक्षकक संग प्रधान शिक्षकक रूपमे कार्यरत भऽ गेल छला। हिनकर प्रथम योगदान सहायक शिक्षक रूपमे प्राथमिक विद्यालय तारापट्टी (अन्धराठाढ़ी)मे भेलैन। कुछ वर्षक बाद स्थानान्तरित होकर उ.म. विद्यालय बसुआरा आबि गेला। हिनकर अप्पन फराक शिक्षण-शैली आ कार्य-शैली छेलैन, जइसँ सभठाम सभकियो सन्तुष्ट रहै छेलैन; विद्यालयमे ई प्रधानाध्यापक होइक नाते सदिखन छात्र-छात्राक मनोबलकेँ बढ़बैत रहला। ई सुयोग्य शिक्षकक रूपमे विद्यालयमे तथा विद्यालयसँ बाहर सेहो चर्चित रहला। विद्यालयमे रहिकऽ ई ‘बालिका-शिक्षा’पर तथा ‘सर्व-शिक्षा’पर सेहो विशेष ध्यान देलखिन। बालिका सभकेँ शिक्षाक लेल उन्मुख करबाक लेल अभिभावकलोकनिकेँ सेहो ई समय-समयपर सांस्कृतिक कार्यक्रमक माध्यमसँ प्रेरित करैत रहला। ऐ कड़ीमे प्रशंसनीय और प्रभावकारी दूटा स्वलिखित छात्र-नाटक ‘संकल्प’ और ‘खजाना’ केर मंचन सेहो केलैन, जइमे ई स्वयं शिक्षकक की भूमिका अदा केलैन। मण्डलजी सेवाक अन्तिम क्षणमे घोघरडीहा प्रखण्डक अधीनस्थ उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बसुआरासँ 2016 ईस्वीमे प्रधानाध्यापक रूपमे अवकाश प्राप्त केलैन। सम्प्रति ई अवकाश प्राप्त शिक्षक रहैत शिक्षणे कार्य संचालित कऽ रहला अछि। वर्त्तमानमे पदमावती आर. पी. शैक्षणिक संस्था, निर्मलीक निर्देशक छैथ। समाज-चिन्तक रूपमे ई पिछड़ल समाजकेँ जगबैले तथा लुढ़कल समाजकेँ उठबैले तथा अति कमजोर छात्रकेँ समुचित दिशा देखबैले प्रगतिशील बौद्धिक समाज, निर्मली सन आदर्श संस्था चला रहल छैथ। किछु-ने-किछु लिखैत रहब हिनक शौक जकाँ रहलैन अछि। वर्त्तमानमे महान रचनाकार मैथिली-शिल्पी एवम् अवार्डेड उपन्यासकार आरदणीय श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजीक संग साहित्य-जगतमे विचरण कऽ रहला अछि। मैथिलीमे प्रस्तुत पोथी ‘बगवार’ पद्यमे उपन्यासक बाद गद्यमे ‘बौकी’ नामक उपन्यास लिखि रहला अछि। अन्य- कहानी संग्रह: ‘झुन-झुन बेटी’, ‘अजूबा पेड़’, ‘वफादार कुत्ता’। नाटक: ‘संकल्प’, ‘खजाना’, ‘अछूत बेटी’, ‘गरीब पतोहु’, ‘सातवचन’, ‘सत्कार’। संस्मरण: ‘जयमाला मंच’, ‘मुशहरनिया का अतीत’, ‘मुंशी सुन्दर लाल मण्डल’, ‘ठूठा वरगद’।
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