रिचर्ड फ्रांसिस बर्टन
सर रिचर्ड फ्रांसिस बर्टन | |
|---|---|
Richard Francis Burton | |
सर रिचर्ड फ्रांसिस बर्टन (1864) | |
| जन्म | 19 मार्च 1821 टोरक्वे (Torquay), डेवोनशायर, इंगलैण्ड |
| मृत्यु | 20 अक्टूबर 1890 (उमरि 69) ट्राइस्टे (Trieste), ऑस्ट्रिया-हंगरी (वर्तमान इटली) |
| राष्ट्रियता | ब्रिटिश |
| शिक्षा | ट्रिनिटी कॉलेज, ऑक्सफोर्ड (निष्कासित) |
| व्यवसाय | खोजकर्ता, भूगोलवेत्ता, अनुवादक, लेखक, सैनिक, प्राच्यविद (Orientalist), राजनयिक, भाषाविद |
| प्रसिद्धि कारण | मक्काक ऐतिहासिक यात्रा, नील नदीक उद्गमक खोज, 'अरेबियन नाइट्स' आ 'कामसूत्र' केर अङ्ग्रेजी अनुवाद |
| जीवनसाथी(सभ) | इसाबेल अरुंडेल (विवाह. 1861) |
| हस्ताक्षर | |
सर रिचर्ड फ्रांसिस बर्टन (अङ्ग्रेजी: Sir Richard Francis Burton; 19 मार्च 1821 – 20 अक्टूबर 1890) एकटा ब्रिटिश खोजकर्ता, भूगोलवेत्ता, अनुवादक, लेखक, सैनिक, प्राच्यविद (Orientalist) आ राजनयिक छलाह। ओ 19म शताब्दीक विक्टोरियन युग मे एशिया, अफ्रीका आ अमेरिका जकाँ महाद्वीप सभ मे कएल गेल अपन विस्तृत आ जोखिम भरल यात्रा सभक हेतु जानल जाइत छथि। बर्टन केँ 29 सँ अधिक भाषा आ बोलीक ज्ञान छल। ओ मुख्य रूप सँ वेश बदलि कऽ मक्का (Mecca) केर यात्रा करबाक, जॉन हनिंग स्पेकक संगे मध्य अफ्रीकी महान झील सभ धरि पहुँचबाक आ 'कामसूत्र' तथा 'अरेबियन नाइट्स' (The Book of the Thousand Nights and a Night) जकाँ ग्रन्थ सभक अङ्ग्रेजी भाषा मे अनुवाद करबाक हेतु प्रसिद्ध छथि।
प्रारम्भिक जीवन आ शिक्षा-दीक्षा
[सम्पादन करी]रिचर्ड फ्रांसिस बर्टनक जन्म इंगलैण्डक टोरक्वे (Torquay) नामक नगर मे भेल छल। हुनक पिता जोसेफ नेट्टरविले बर्टन ब्रिटिश सेना मे एकटा अधिकारी छलाह। बर्टनक पिता अस्थमा (श्वास रोग) सँ पीड़ित छलाह, जकर कारणेँ स्वास्थ्य लाभक खोज मे हुनक परिवार केँ फ्रांस (टूर्स) आ इटली (लिवोर्नो) जकाँ यूरोपीय देश सभ मे जा कऽ बसय पड़लन्हि।[१] निरन्तर यात्रा सभ मे बाल्यकाल बितेबाक कारणेँ बर्टन अल्प आयु मे हि फ्रेंच, इतालवी, नीपोलिटन आ लैटिन जकाँ भाषा सभ सहजता सँ सिखि लेलन्हि।
1840 मे, उच्च शिक्षा प्राप्त करबाक उद्देश्य सँ ओ ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालयक ट्रिनिटी कॉलेज मे प्रवेश लेलन्हि। तथापि, हुनक मन पारम्परिक शिक्षा प्रणाली मे नहि लागल। 1842 मे एकटा घुड़दौड़ कार्यक्रम (स्टीपलचेज) मे भाग लऽ कऽ कॉलेजक नियम सभक उल्लङ्घन करबाक कारण हुनका विश्वविद्यालय सँ निष्कासित कऽ देल गेल।[२]
सैन्य करियर आ भारत आगमन
[सम्पादन करी]ऑक्सफोर्ड सँ निष्कासित कएल जेबाक पश्चात, बर्टन ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनीक सेना मे सम्मिलित भऽ गेलाह। 1842 मे ओ भारतक बॉम्बे (आब मुम्बई) शहर पहुँचल छलाह आ हुनका 18म बॉम्बे नेटिव इन्फैंट्री मे तैनात कएल गेल छल। एकर किछु समयक पश्चात हुनका सिंध प्रान्त (वर्तमान पाकिस्तान) मे नियुक्त कएल गेल।
भारत मे रहबाक अवधि मे बर्टन स्थानीय संस्कृति, धर्म आ भाषा सभक गहन अध्ययन केलन्हि। अपन भाषाई प्रतिभाक बल पर ओ हिन्दी, गुजराती, मराठी, सिंधी, पंजाबी, फारसी आ अरबी भाषा सभ पर अधिकार प्राप्त कऽ लेलन्हि।[३] ओ स्थानीय रीति-रिवाज आ पहिरन केँ एहि हद धरि अपना लेने छलाह जे ओ वेश बदलि कऽ स्थानीय बाज़ार आ महफिल सभ मे घुमैत छलाह। एकरा सँ हुनका सेनाक हेतु खुफिया जानकारी (Intelligence) जूटयबा मे सुगमता होइत छल आ ओ "रफ़ियन डिक" केर नाम सँ जानल जाय लागलाह।
मक्काक ऐतिहासिक यात्रा (1853)
[सम्पादन करी]बर्टनक प्रमुख यात्रा सभ मे 1853 केर मक्का आ मदीनाक यात्रा सम्मिलित अछि। ओहि समय मे कोनो भी गैर-मुस्लिम केँ मक्का मे प्रवेश करबाक अनुमति नहि छल आ पकड़ायल जेबा पर मृत्युदण्ड देल जाइत छल। रॉयल जियोग्राफिकल सोसाइटीक आर्थिक समर्थन सँ, बर्टन एकटा अफगान (पश्तून) मुस्लिमक वेश धारण केलन्हि आ खतना करा कऽ सफलतापूर्वक हज यात्रा पूर्ण केलन्हि। एहि साहसिक यात्रा सँ हुनका सम्पूर्ण यूरोप मे ख्याति भेटलन्हि। ओ अपन एहि अनुभव सभ केँ अपन पुस्तक अ पर्सनल नैरेटिव ऑफ ए पिलग्रिमेज टू अल-मदीना एंड मक्का (1855) मे विस्तार सँ दर्ज केने छथि।[४]
नील नदीक उद्गमक खोज आ विवाद
[सम्पादन करी]1856 मे, रॉयल जियोग्राफिकल सोसाइटी बर्टन आ एकटा आन ब्रिटिश अधिकारी, जॉन हनिंग स्पेक केँ नील नदीक उद्गम (स्रोत) केर पता लगयबाक हेतु पूर्वी अफ्रीकाक एक अभियान पर पठेलक। ई अभियान अत्यन्त कठिन छल; दुनू खोजकर्ता मलेरिया, ज्वर (बुखार) आ आन उष्णकटिबंधीय बीमारी सभ सँ गम्भीर रूप सँ पीड़ित भेलाह।
1858 मे, ओ लेक टंगानिका (Lake Tanganyika) धरि पहुँचनिहार प्रथम यूरोपीय बनलाह। जखन बर्टन बीमारीक कारणेँ शिविर मे विश्राम कऽ रहल छलाह, तखन स्पेक उत्तरक दिस यात्रा केलन्हि आ एकटा विशाल झीलक खोज केलन्हि, जकरा ओ महारानीक सम्मान मे लेक विक्टोरिया (Lake Victoria) नाम देलन्हि। स्पेकक ई विश्वास छल जे एही झील नील नदीक असली उद्गम थिक, जखन कि बर्टन एहि बात सँ असहमत छलाह आ लेक टंगानिका केँ उद्गम मानैत छलाह। एहि असहमतिक कारणेँ दुनू खोजकर्ता सभक मध्य इंगलैण्ड मे एकटा लम्बा आ सार्वजनिक विवाद चलल, जे ओहि समयक समाचार पत्र सभक चर्चाक विषय रहल।[५]
साहित्य आ अनुवाद काज
[सम्पादन करी]अपन जीवनक उत्तरार्ध मे, बर्टन ब्रिटिश वाणिज्यदूत (Consul) केर रूप मे अफ्रीकाक फर्नांडो पो, सैंटोस (ब्राज़ील), दमिश्क (सीरिया) आ अन्ततः ट्राइस्टे (ऑस्ट्रिया-हंगरी) मे अपन सेवा देलन्हि।
बर्टन एकटा लेखक आ अनुवादक छलाह। ओ 'कामशास्त्र सोसायटी' केर सह-स्थापना केलन्हि, जकर मुख्य उद्देश्य ओहि पूर्वी पुस्तक सभ केँ छापि कऽ यूरोपीय पाठक सभ धरि पहुँचायब छल जाहि पर ओहि समयक रूढ़िवादी विक्टोरियन समाज मे पूर्ण रूप सँ प्रतिबन्ध लागल छल। ओ 1883 मे महर्षि वात्स्यायनक कामसूत्र केर आ 1885 मे अरेबियन नाइट्स (द बुक ऑफ द थाउजेंड नाइट्स एंड ए नाइट) केर 16 खण्ड सभ मे बिना सेंसर कएल गेल (Uncensored) अङ्ग्रेजी अनुवाद प्रकाशित केलन्हि। हुनक एहि अनुवाद सभ तत्कालीन समाज मे चर्चाक विषय बनल।[६][७]
मृत्यु आ विरासत
[सम्पादन करी]20 अक्टूबर 1890 केँ ट्राइस्टे मे हृदय गति रुकबा (हार्ट अटैक) केर कारणेँ बर्टनक निधन भऽ गेलन्हि।[८] हुनक मृत्युक पश्चात, हुनक पत्नी इसाबेल हुनक बहुत रास अप्रकाशित पाण्डुलिपि सभ आ व्यक्तिगत डायरी सभ केँ जरा देलन्हि। इसाबेलक ई मानब छल जे ओहि कागजात सभ मे मौजूद सामग्री बर्टनक सामाजिक प्रतिष्ठा केँ क्षति पहुँचा सकैत अछि। ऐतिहासिक दस्तावेज़ सभ केँ नष्ट करबाक एहि काजक हेतु आधुनिक इतिहासकार लोकनि द्वारा इसाबेलक आलोचना कएल जाइत अछि।
बर्टन केँ लन्दनक मोर्टलेक स्थित कैथोलिक कब्रिस्तानक एकटा मकबरा मे दफनाओल गेल अछि, जकरा एकटा अरब तंबू (Arab tent) केर विशिष्ट आकार देल गेल अछि।
संदर्भ
[सम्पादन करी]- ↑ "The Life of Sir Richard Burton, by Thomas Wright (chapter1)", ebooks.adelaide.edu.au, मूलसँ २०१४-०९-०८ मे सङ्ग्रहित, अन्तिम पहुँच २०२६-०३-११।
|dead-url=प्यारामिटर ग्रहण नहि कएल (सहायता) - ↑ "The Life of Sir Richard Burton, by Thomas Wright (chapter2)", ebooks.adelaide.edu.au, मूलसँ २००८-०८-२० मे सङ्ग्रहित, अन्तिम पहुँच २०२६-०३-११।
|dead-url=प्यारामिटर ग्रहण नहि कएल (सहायता) - ↑ Ghose, Indira (२००६-०९-०१), "Imperial Player: Richard Burton in Sindh", in Youngs, Tim, Travel Writing in the Nineteenth Century (1 संस्करण) (Anthem Press): 71–86, आइएसबिएन 978-1-84331-769-2, डिओआई:10.7135/upo9781843317692.005, अन्तिम पहुँच २०२६-०३-११।
- ↑ Burton, Richard Francis (1893). Personal narrative of a pilgrimage to Al-Madinah [and Meccah]. Robarts - University of Toronto. London, Tylston. http://archive.org/details/personalnarrati01burt.
- ↑ Jeal, Tim (2011-11-01) (enमे). Explorers of the Nile: The Triumph and Tragedy of a Great Victorian Adventure. Yale University Press. आइएसबिएन 978-0-300-17827-2. https://books.google.co.in/books?id=PYwFisNvzJ0C&redir_esc=y.
- ↑ Vatsyāyana (1991). The Illustrated Kama Sutra: Ananga-Ranga and Perfumed Garden - The Classic Eastern Love Texts. Park Street Press. https://openlibrary.org/books/OL8233054M/The_Illustrated_Kama_Sutra.
- ↑ The Book of the Thousand Nights and A Night. s.l.: Burton Society. 1886.
- ↑ "Sir Richard Burton Obibuary", www.wollamshram.ca, अन्तिम पहुँच २०२६-०३-११।
बाहरी कड़ी सभ
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