सामग्री पर जाएँ

हुक्का पाती

मैथिली विकिपिडियासँ, एक मुक्त विश्वकोश
हुक्का पाती
उक्का पाती
अन्य नाम
  • हुक्कापाती
  • हुक्का लोली
  • प्रकाश तर्पण
मैथिल दिवाली संस्कार
प्रस्तुति आ खेल
क्षेत्रमिथिला
अवसरदिवाली पुजा
संस्कारलक्ष्मी घर दरिद्र बाहर
आवश्यक वस्तुरङ्गीन अरबा चाउर, दुबि

हुक्का पाती या उक्का पाती भारतीय उपमहाद्वीपक मिथिला क्षेत्रमे दिवाली पूजाक अवसर पर खेलल जाएवला संस्कारात्मक परम्परा आ प्रस्तुति छी। हुक्का पाती केर परम्परा ई क्षेत्रमे देवी लक्ष्मी केर आह्वानक प्रतीक छी।[] लक्ष्मी देवी केर आह्वानक प्रतीक बाहेक एहि क्षेत्रमे बैसनिहार हिन्दु धर्मावलम्बीसभ अप्पन अप्पन पूर्वजसभकेँ प्रकाश तर्पण (प्रकाश अर्पण) दैत अछि सेहो कारण एकर विशिष्ट महत्व अछि।[] स्थानीय रूपसँ एकरा हुक्का लोली केर नामसँ सेहो जानल जाइत अछि।[]

ई दिवाली पूजा केर साँझमे देवी लक्ष्मी आ भगवान गणेशक पूजा भेलाक बाद स्नान करि ई संस्कार विधि कएल जाइत अछि। ई प्रस्तुतिमे घरक सम्पूर्ण सदस्यसभ पूजा कक्षमे राखल दिया (दीप) सँ हुक्का पाती जराबैत अछि। प्रस्तुतिक समयमे एक हाथमे अरबा चाउर लऽ कऽ घरक सब कक्षमे छिटैत घरक मुख्य द्वारसँ बाहर निकलि दरबज्जा पर जमा भऽ एक सङ्गे हुक्का बाती खेलाइत अछि। संस्कार प्रक्रियाक समयमे सब कियो 'लक्ष्मी घर दरिद्र बहार... लक्ष्मी घर दरिद्र बहार' कऽ नारा लगाबैत अछि जकर अर्थ 'देवी लक्ष्मी घरमे आबी आ गरीबी बाहर भगाबी' होइत अछि। अन्ततः अप्पन हुक्का पाती केर शेष भागसँ पाँच टा सनठी लऽ कऽ अपन भगवानक घरमे राखि भगवानक प्रणाम करल जाइत अछि। ई परम्परा सम्पन्न भेलाक बाद पूरा गाम समाजमे रहल बुजुर्गकेँ प्रणाम करबाक प्रथा अछि। हुक्का पाती खेललाक बाद घरक बुजुर्ग महिला परिवारक सब कियो केर चुमाओन करैत आशीर्वाद दैत अछि आ फेर मिठाई खुआबैत अछि।[][][][] एकर बाद समाजक हर परिवारक लोक एक दोसर केर घर जा कए मिलन आ आशीर्वाद मगैत अछि। समाजमे सामाजिक सौहार्द कायम रखबामे एकर विशेष महत्व अछि।[]

हुक्का पाती प्रस्तुति भेलाक बाद हुक्का लोली केर एकटा आओर लगभग एहने प्रस्तुति सेहो होइत अछि। मिथिला क्षेत्रमे हुक्का लोली शब्द घरमे पुरान आ फाटल कपड़ासँ बनल गोला केर सन्दर्भित करैत अछि। एकरा धातु केरऽ मजबूत तारसँ बान्हल जाइत अछि ताकि एकरा कलाकारद्वारा अप्पन स्वयं केर चारो दिस घूमि सकी। हुक्का लोली केर गोला दिवाली पूजासँ एक दिन पहिने तैयार कएल जाइत अछि आ राति भरि मट्टीतेलमे डुबाए राखल जाइत अछि। दिवाली पूजाक राति एकरा एकटा नमहर धातुक तारमे बान्हल जाइत अछि आ फेर गेन्दमे आगि लगाएल जाइत अछि आ अग्नि गोला केर प्रस्तुत केनिहर कलाकार अप्पन चारो दिस घुमावदार प्रदर्शन करैत घुमबैत अछि। एकरा हुक्का लोली कहल जाइत अछि।[]

किम्बदन्ती

[सम्पादन करी]

मिथिला क्षेत्रमे किम्बदन्ती अनुसार मैथिल लोकसभ प्राचीन कालसँ एहि परम्परा केर पालन करैत आएल मान्यता अछि। परम्परामे मिथिलावासी परिवार, रिश्तेदार आ मित्र केर सुख आ समृद्धिक कामना करैत ई संस्कार कएल जाइत अछि। मैथिल लोकनि साँझमे अप्पन पूर्वजसभकेँ प्रकाश तर्पण चढ़बैत छथि। मिथिलामे दिवाली पूजाक अवसर पर परिवारक पूर्वजसभकेँ सेहो याद कएल जाइत अछि।[]

सन्दर्भ सामग्रीसभ

[सम्पादन करी]
  1. 1 2 "दिवाली में हुक्का पाती का हैविशेष महत्व", www.livehindustan.com (हिन्दीमे), २०२४-१०-२३, अन्तिम पहुँच २०२५-१०-०८
  2. 1 2 3 4 "Deepawali: मिथिला की प्राचीन परंपरा है पितरों को प्रकाश तर्पण - Deepawali festival celebreating in Mithila", Jagran (हिन्दीमे), अन्तिम पहुँच २०२५-१०-०८
  3. 1 2 "मिथिला में हुक्का-लोली जलाकर मनती है दीपावली", www.livehindustan.com (हिन्दीमे), २०२४-१०-३१, अन्तिम पहुँच २०२५-१०-०८
  4. "मिथिलांचल में "हुक्का-पाती' खेल िदवाली मनाने की परंपरा है प्रसिद्ध", Dainik Bhaskar
  5. "दिवाली पर क्यों खेलते हैं हुक्का पाती, कितने सनठि की होती है जरूरत? यहां जानें पूरी प्रक्रिया", News18 हिंदी (hi-INमे), २०२४-१०-३० कऽ मूल रूप सङ्ग्रहित, अन्तिम पहुँच २०२५-१०-०८ |dead-url= प्यारामिटर ग्रहण नहि कएल (सहायता)