आशीष अनचिन्हार

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आशीष अनचिन्हार (Ashish Anchinhar)
जन्म आशीष कुमार मिश्र
(१९८५-१२-०४) ४ दिसम्बर १९८५ (उमर ३३)
भटरा घाट, मधुबनी, भारत
राष्ट्रियता भारतीय
रोजगार
  • मैथिली गजलकार
  • आलोचक
  • व्यंग्यकार
कार्यकाल 2001-वर्तमान
सम्बन्धी श्री कृष्ण चन्द्र मिश्र (पिता)
श्रीमती गम्भीरा मिश्रा (माता)

आशीष अनचिन्हार (अङ्ग्रेजी: Ashish Anchinhar) मैथिली गजल लेल जानल जाइ छथि। हिनक मूल नाम आशीष कुमार मिश्र (अङ्ग्रेजी: Ashish Kumar Mishra) छनि । अनचिन्हारजीक जन्म बिहारक मधुबनी जिलाक भटरा घाट नामक गाममे 04 दिसम्बर 1985 के भेल छनि।[१] आशीषजी वृतिसँ आपूर्ति शृङ्खला प्रबन्धन प्रोफेशनल छथि आ देश-विदेशक विभिन्न बहुराष्ट्रिय कम्पनीमे सम्भार तन्त्र केर सफल सञ्चालन कऽ रहल छथि ।

पारिवारिक जीवन एवं शिक्षा[सम्पादन करी]

अनचिन्हारजी अपन परिवारक सभसँ छोट छथि। हुनकासँ नमहर दूटा भाए श्री गोविन्द मिश्र (पत्नी-श्रीमती ममता मिश्र), श्री मनोज कुमार मिश्र (पत्नी-श्रीमती हेमा मिश्र) आ बहीनि रिंकी झा (पति-श्री अरूण झा) छथिन। बाबा- स्व. अनिरुद्ध मिश्र (स्व. भुवनेश्वरी देवी)। मामा गाम- जजुआर, नाना- स्व. भाग्यनारायण ठाकुर, जेठ मामा- स्व. वशिष्ठ नारायण ठाकुर, छोट मामा- श्री घनश्याम ठाकुर। अनचिन्हारजीक प्रारंभिक शिक्षा गामक इस्कूलमे भेलनि तकरा बाद मैट्रिक बिस्फीक इस्कूलसँ। एकर बादक शिक्षा कलकत्तासँ पूर्ण भेलनि।

साहित्यिक जीवन एवं अन्य क्रियाकलाप[सम्पादन करी]

नेनपनेसँ तुकान्त जोड़बाक आदति सन् 2001 मे गजलक रूपमे बदलि गेलनि । प्रारम्भमे अनचिन्हारजी गीत, व्यङ्ग्य, कविता ओ कथा सेहो लिखलाह मुदा सन् 2001 मे ई पूर्ण रूपेण गजल सीखब शुरू केलनि आ सन् 2008मे गजल केन्द्रित ब्लाग अनचिन्हार आखर केर निर्माण केला । एहि ब्लागसँ एखन धरि अनचिन्हारजी कुल 30-32 टा मैथिली गजलकारकेँ प्रशिक्षित कऽ मैथिली गजलकेँ विस्तार देलाह।[२] हिनक एक गीत रेकार्ड भऽ कऽ सेहो "बम-गोला" नामक एलबममे आएल अछि। [३]

प्रकाशित कृति[सम्पादन करी]

  • अनचिन्हार आखर (गजल, रुबाइ ओ कता सङ्ग्रह)[४]
  • मैथिली गजलक व्याकरण ओ इतिहास(ई भर्सन प्रकाशित)[५]

गजेन्द्र ठाकुरक संगे सह-सम्पादित पोथी

  • मैथिली गजल: आगमन ओ प्रस्थान बिन्दु (गजलक आलोचना-समालोचना-समीक्षा), ई-भर्सन प्रकाशित [६]
  • मैथिलीक प्रतिनिधि गजल (१९०५सँ २०१६ धरि), ई-भर्सन प्रकाशित [७]

एकर अतिरिक्त विभिन्न पत्र-पत्रिकामे विभिन्न विधाक रचना सभ प्रकाशित। [८][९] [१०] [११][१२] हिनक व्यंग्य केर हिंदी अनुवाद सेहो भेल अछि। [१३]

आलोचना[सम्पादन करी]

गजलक अतिरिक्त अनचिन्हारजी बहुत रास आलोचना लिखने छथि जे कि अपन एकटा खास शैली आ बेबाकीक कारणे विवादित भेल आ बहुसङ्ख्य मैथिलीक गुटबाज साहित्यकार सभ द्वारा अनचिन्हारजीक जानि बूझि कऽ बहिष्कार सेहो भेल मुदा अनचिन्हारजी पुरस्कार ओ गुटबाजीसँ प्रेरित संस्था सभकेँ दरकिनार करैत बेबाक भऽ अपन खास शैलीक आलोचना लिखैत रहला ।

सम्मान[सम्पादन करी]

बर्ख 2014-15 लेल विदेह भाषा सम्मान(समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान)सँ पोथी “अनचिन्हार आखर” (गजल संग्रह) लेल सम्मानित।[१४]

सन्दर्भ सामग्री[सम्पादन करी]