गायत्री मन्त्र

मैथिली विकिपिडियासँ, एक मुक्त विश्वकोश
एतय जाए: भ्रमण, खोज

गायत्री महामंत्र[सम्पादन करी]

ॐ भूर्भुव स्वः। तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

हिन्दी में भावार्थ 

उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।

मैथिलि मs भावार्थ 

प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा कs हम अन्तःकरण सs धारण करैतछि । परमात्मा हमर सभकs बुद्धि,सन्मार्ग में प्रेरित करू ।