नीरव समदर्शी
नीरव समदर्शी एकटा पत्रकार, कवि आ साहित्यकार छथि। पूर्व मे ओ ‘साधना प्राइम न्यूज़’ चैनलक ब्यूरो इंचार्ज रहि चुकल छथि आ अहिबेर हिन्दी दैनिक मालंच नई सुबहक संपादक छथि। ओ बिहार मे पत्रकारिता आ साहित्यक क्षेत्र मे सक्रिय छथि। संगहि, ओ हिन्दी साहित्य सम्मेलनक प्रवक्ता आ ऑल इंडिया रिपोर्टर्स एसोसिएशनक प्रदेश महासचिव रूपेँ सेहो जानल जाइत छथि।
हुनका संबंध मे मुख्य बात
पत्रकारिता:
ओ साधना प्राइम न्यूज़ चैनल मे ब्यूरो इंचार्ज रहल छथि आ अहिबेर मालंच नई सुबहक संपादक छथि।
साहित्य
ओ कवि आ साहित्यकार रूपेँ सेहो अपन पहचान बनौने छथि।
अन्य भूमिका:
ओ हिन्दी साहित्य सम्मेलनक प्रवक्ता आ ऑल इंडिया रिपोर्टर्स एसोसिएशनक प्रदेश सचिव छथि। मौरिसश भारत मैत्री संघ कार्यकारिणी सदस्य छैथह
स्थानीय टीवी:
ओ वर्ष 2000 मे मालंच टीवीक प्रसारण प्रबंध निदेशकक पद सँ शुरू कएलनि।
अन्य अनुभव:
ओ नक्षत्र न्यूज़ मे कार्यकारी प्रोड्यूसर (बिहार) रूपेँ काज कएलनि आ मासिक पत्रिका अनुपम उपहार लेल कॉलम सेहो लिखलनि।
नीरव समदर्शी : पत्रकारिता और साहित्य का समर्पित हस्ताक्षर
नीरव समदर्शी का नाम आज के समय में बिहार की पत्रकारिता और साहित्य दोनों क्षेत्रों में अपनी विशेष पहचान बना चुका है। वे एक पत्रकार, कवि और साहित्यकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। अपने व्यावसायिक सफर में उन्होंने ‘साधना प्राइम न्यूज़’ चैनल के ब्यूरो इंचार्ज के रूप में कार्य किया और वर्तमान में हिन्दी दैनिक मालंच नई सुबह के संपादक हैं।
पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य क्षेत्र में भी उनका योगदान प्रशंसनीय रहा है। वे अपनी कविताओं के माध्यम से समाज और जीवन के विविध पहलुओं को उजागर करते रहते हैं।
नीरव समदर्शी हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रवक्ता और ऑल इंडिया रिपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव के रूप में भी सक्रिय हैं। यह भूमिकाएँ उन्हें संगठनात्मक नेतृत्व और पत्रकार समाज में प्रतिष्ठा प्रदान करती हैं।
साल 2000 में उन्होंने अपने प्रयास से मालंच टीवी का प्रसारण प्रबंध निदेशक के रूप में आरंभ किया। इस प्रयास से स्थानीय पत्रकारिता को नया स्वरूप मिला। उन्होंने नक्षत्र न्यूज़ में कार्यकारी प्रोड्यूसर (बिहार) के रूप में भी कार्य किया और मासिक पत्रिका अनुपम उपहार के लिए निरंतर कॉलम लिखा।
नीरव समदर्शी केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक आवाज़ हैं — जो सामाजिक सरोकार, शिक्षा, साहित्य और जनमानस के मुद्दों को निडरता से उठाते हैं। उनकी लेखनी और नेतृत्व से बिहार की पत्रकारिता और साहित्य दोनों को नई ऊर्जा प्राप्त हो रही है।