फणीश्वर नाथ 'रेणु'
| फणीश्वरनाथ रेणु | |
|---|---|
| जन्म | 4 मार्च 1921 औराही हिंगना, अररिया जिला, बिहार |
| मृत्यु | 11 अप्रैल 1977 पटना, बिहार |
| पेशा | लेखक, कथाकार, पत्रकार |
| भाषा | हिंदी, मैथिली |
| शैली | आंचलिक उपन्यास, कहानी |
फणीश्वरनाथ रेणु (4 मार्च 1921 – 11 अप्रैल 1977) भारतीय साहित्यक प्रमुख आंचलिक लेखक छलाह। हुनकर रचनाक केंद्र ग्रामीण जीवन, समाजिक यथार्थ, भाषा-संस्कृति आ आम जनक पीड़ा रहल अछि। हुनका विशेष रूप सँ “आंचलिक उपन्यास” परंपराक प्रवर्तक मानल जाइत अछि। हुनकर प्रसिद्ध उपन्यास मैला आँचल भारतीय साहित्यक एक महत्वपूर्ण कृति मानल जाइत अछि।[१]
प्रारंभिक जीवन
[सम्पादन करी]रेणुजीक जन्म बिहारक अररिया जिलाक औराही हिंगना गाम में भेल छल। प्रारंभिक शिक्षा बिहार आ नेपाल में भेल। हुनका पर स्वतंत्रता आंदोलन आ समाजिक चेतनाक गहिर प्रभाव रहल। हुनका जीवन अनुभव हुनकर साहित्य में स्पष्ट रूप सँ देखल जाइत अछि।[२]
साहित्यिक योगदान
[सम्पादन करी]रेणुजी अपन लेखन द्वारा हिंदी साहित्य में ग्रामीण आंचलिक जीवन केँ केंद्र में आनलन्हि। हुनकर भाषा सहज, जीवंत आ लोकजीवन सँ जुड़ल अछि। हुनकर रचनामे किसान, मजदूर, स्त्री आ समाजक हाशिये पर रहल वर्गक पीड़ा प्रमुख रूप सँ उभरैत अछि।
प्रमुख कृतियाँ
[सम्पादन करी]- मैला आँचल
- परती परिकथा
- तीसरी कसम
- जुलूस
- संवदिया
सम्मान आ प्रभाव
[सम्पादन करी]रेणुजी केँ मरणोपरांत पद्मश्री देल गेल। हुनकर साहित्य भारतीय समाजिक यथार्थक दस्तावेज मानल जाइत अछि। हुनकर कृतियाँ पर आधारित फिल्म तीसरी कसम सेहो अत्यंत प्रसिद्ध भेल।[३]
विरासत
[सम्पादन करी]फणीश्वरनाथ रेणु आजो भारतीय ग्रामीण समाजक सबसे सशक्त साहित्यिक आवाज मानल जाइत छथि। हुनकर लेखन भावी पीढ़ी लेल समाज, संस्कृति आ भाषा बुझबाक महत्वपूर्ण साधन अछि।
संदर्भ
[सम्पादन करी]- ↑ "Phanishwar Nath Renu Profile", Britannica।
- ↑ "फणीश्वरनाथ रेणु का जीवन परिचय", Rajkamal Prakashan।[permanent dead link]
- ↑ "Padma Awards – Phanishwar Nath Renu", Government of India।