विभूति आनन्द

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विभूति आनन्द 1953-

जन्म: शिवनगर, मधुबनी, बिहार। चर्चित कवि, कथाकार, संपादक । प्रकाशित कृति टूटा उपन्यास टूटा समीक्षा, तीन टा कथ संग्रह, टूटा गीत-गजल संग्रह ओ चारिटा कथा-संग्रह प्रकाशित।२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार । विभूति आनन्द जीक परिचय


जन्म : 4.10.1955

स्थान : शिवनगर, मधुबनी

शिक्षा : पी.एच.डी., पटना विश्वविद्यालय, पटना

वृत्ति : दैनिक मिथिला मिहिरमे कार्यालय संवाददाता मैथिली अकादमी, पटनामे शोध सहायक,जिला स्कूल, मुंगेरमे +2 व्याख्याता

सम्प्रति : आर. एन कालेज, पण्डौलमे अध्यापन

गतिविधि : पूर्वमे विभिन्न राजनीतिक दल, भाषा आन्दोलन ओ रंगमंचसँ सम्बन्ध। तहिना मैथिलीभाषी छात्र संघ,भंगिमा, जानकी महोत्सव समिति, जखन-तखन आदि संस्थाक संस्थापक-सदस्य। 74क छात्र आन्दोलनमे जेल यात्रा

सम्मान : साहित्य अकादेमी पुरस्कार, 2006 दिनकर राष्ट्रीय सम्मान-2008

सम्पर्क : 09431857613


विभूति आनन्दक चास–बास

कवितासंग्रह : डेग, उपक्रम, पुनर्नवा होइत ओ छौंड़ी, नेहाइपर स्वप्न, उठा रहल घोघ तिमिर, झूमि रहल पाथर–मन

कथासंग्रह : प्रवेश, खापड़ि महक धान, काठ

उपन्यास : गाम सुनगैत, पराजित–अपराजित

नाटक : समय–संकेत, तित्तिरदाइ, हाली–हाली बरिसू, फ्रेममे बन्द एकटा उखरल फोटो

समीक्षा : श्री ललित आ हुनक कथायात्रा, स्मरणक संग, ललित, भाषा–टीका

संपादन : गीतनाद, विद्यापति पदावली, मैथिली कथा–साहित्य, अहुल, एकटा छला गोनू झा, कथा कहिनी, विद्यापतिक पदावली (सभटा पुस्तक)

संपादन : लालधूआँ, माटिपानि, भाखा, हालचाल, मैथिली अकादमी पत्रिका, दैनिक मिथिला मिहिर, दृष्टि, कूस, अंग मैथिली, समाद, भंगिमा, हाक, मनीषा, डगर, जनता।

सम्प्रति : जखन–तखन (सभटा पत्रिका) एकर अतिरिक्त ‘प्रो. हरिमोहन झा अभिनन्दनग्रंथ’ तथा ‘निखिल भारतीय मैथिली भाषी छल’,‘अरिपन’ ओ ‘प्रो. हरिमोहन झा अभिनन्दन समारोह’ स्मारिकाक संपादन सेहो

अनुवाद    :    मैथिल शहीद बैकुण्ठ शुक्ल                                         (बंगला),
 मूल      :     विभूति भूषण दास गुप्त तथा जीव                                     विज्ञान (हिन्दी)
 मूल     :     सुबोध बिहारी सहाय

यंत्रस्थ : एकटा रहए गप्पू (उपन्यास), ताला, एकटा उड़ल फुर्र! (कथासंग्रह), एकटा साम्यवादीक आत्मकथा (कवितासंग्रह), गामक चिट्ठी (स्तम्भ), हरिमोहन बाबूक रचना– संसार,

स्मरणक संग : भाग–दू (समीक्षा)

 सम्प्रति        :    अनथक लेखन जारी....