दशावतार

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राजा रवि वर्माद्वारा १९अम शताब्दिमे सिर्जित विष्णु अवतारक चित्रकला

दशावतार ( संस्कृत: दशावतार ) पालनकर्ता भगवान विष्णुकऽ दश मुख्य अवतारसभके जनावैत अछि । ब्रह्माण्डक नियम पालना करैल भगवान विष्णु अवतार लैएत अछि ।

दशावतारमे मत्स्य अवतार, कूर्म अवतार , बराह अवतार, नृसिँह अवतार, वामन अवतार, परशुराम अवतार ,श्रीराम अवतार, कृष्ण, बलराम वा बुद्धकल्की अवतार मानैत अछि । दशावतारमे कृष्णके नै मनैवाला परम्परामे , कृष्णके सम्पूर्ण अवतारक मूल मानैत अछी । कोनो परम्परामे कृष्ण वा बुद्धक साटो जगनाथके लेएत अछि । कल्की बाहेक सब अवतारसभ पृथ्वीमे देखा परैत अछिने कल्की कलि युगक अन्तिम समयमे प्रकट होएत अछि ।

व्याख्या[सम्पादन करी]

दशावतारको सुची बिभिन्न क्षेत्रअनुसार फरक फरक हुन सक्छन । तलको तालिकामा दशावतारका बिभिन्न अवतारहरुको श्रेणी सहितको सारांस प्रस्तुत गरेको छ ।

अवतार स्थान युग
[१]
मत्स्य सत्य
कुर्म
बराह
नारासिम्ह
वामन त्रेता
परशुराम
राम
कृष्ण (८) वा (९) द्वापर
बलराम (८) वा (९) द्वापर
गौतम बुद्ध (९) कलि
कल्की (१०)

सुची[सम्पादन करी]

  • मत्स्य, भगवान प्रलयक समुद्र बिहार सत्यव्रतके ज्ञान आ भक्तिक उपदेशसभ देलक । हयग्रिव नाम भेल राक्षस वेदसभके समुद्रमे नुका राखने छल भगवान मत्स्य हयग्रिवके मार वेदसभक सेहो उदार केने छल ।
  • कुर्म, मन्दराचल पर्वत समुन्द्रक गहिराईमे डुबे लागल । ई देख देव दानवसभ फेर बिष्णुक शरण लेए पुगल । भगवान विष्णु सेहो कछुवाक रूप धारण करै पर्वतके अपन पिठमे अड्डाएलक।
  • बराह, पृथ्वीके लातसँग हान समुन्द्रमे डुबाउने "हिरण्यक्ष" नाम भेल राक्षसक बध केने छल । जलमे डुबल पृथ्वीके पूर्ववत करै पूथ्वीक उद्दार केने छल ।
  • नरसिंह दैत्यराज हिरण्यकशेपुक बध करैके निमित्त आ भक्त प्रह्लादक उदार करैके निमित्त विष्णु भगवान नरसिँहावतार धारण करै परल छल । आधा शरिर सिँहक आ आधा शरिर लोगके छल ।
  • वामन भगवान विष्णु अदितीक कोखसँग वामन अवतारक रुपमे जन्म लेलक। भगवान वामन ८ बर्षक भेल वाद ब्रह्माजी व्रतबंध देलक। व्रतवंधक देशान्तरमे जा क्रममे भगवान वामन बली राजा लऽ गेल । वामनके देख राजा बलि आदर पूर्वक आफुकहाँ आएल कारण सोधलक । तब वामन बलीके अपन कुछ दान लऽ वाचा करै आग्रह केलक। तब बलि सेहो माग चिज देएल वाचा केलक।
  • परशुरामक मुख्य हतियार परशु (बन्चरो) भेल हिकर नाम परशुराम भेल मानैत अछि । परशुरामक पिताक नाम ऋषि जमदग्नि आ माताक नाम रेणुक छल । परशुराम एक ऋषिपुत्र भेल कारण क्षत्रीय गुणसभ छल । परशुराम २१ पटक पृथ्वीक क्षत्रियसभक संहार केने छल ।
  • श्रीराम अवतार, अयोध्याक राजा दशरथ आ रानी कौशल्याक सब सँ जेठ पुत्र छल । रामक पत्नीक नाम सीता छल (जकर लक्ष्मीक अवतार मानैत अछि) आ हिनकर तीन भाइ छल : लक्ष्मण, भरत आ शत्रुघ्न । राम राक्षस जातिक राजा रावणक वध केलक ।
  • बलराम, बलराम भगवान श्रीकृष्ण पैग भाइ तथा गोकुलक राजा नन्द आ यसोदाक पुत्र छथि। हिनका शेषावतार सेहो मानल जाएत अछी तसर्थ ओ अत्यधिक क्रोधी सहो छल ।
  • कृष्ण[२] श्रीकृष्णके जन्मिएकै घडी कंशसँ बचावेल हिनकर पिता वसुदेव गोकुलवासी नन्द गोपक घरमे छोडने छल ।
  • कल्की अवतार कलि युगक अन्त होएत अछि। जब कलियुगमे लोगसभ धर्मक अनुसरण करैल बन्द करैदेएत अछि तब ई अवतार होएत अछि।

विकासवादी व्याख्या[सम्पादन करी]

कुछ आधुनिक व्याख्यातासभ विष्णुक दशावतारके सरलसँ जटिल जीवक क्रम-विकासक सिद्धान्तसँ देखैत अछी । एहन व्याख्या सर्वप्रथम सन् १८७७ मे हेलेना ब्लावात्सकी केने छल । ओ दशावतारके निम्नानुसार प्रस्ताव केने :[३] right|thumb|275x275px|विष्णु र अवतार

  • मत्स्य - माछा ( प्यालियोजोइक इरा)
  • कुर्म - उभयचर कछुवा (मेसोजोइक इरा)
  • वराह - बँदेल ( सेनोजोइक इरा)
  • नरसिंह - नर आ सिंह अर्ध मानव अवतार (सेनोजोइक इरा)
  • वामन - पहिल मानव स्वरूप अवतार
  • परशुराम -
  • राम - नायक, आदर्श पुरुष , बनारका साथी
  • कृष्ण
  • बुद्ध
  • कल्की - होएल बाकि

सन्दर्भ सामग्रीसभ[सम्पादन करी]

बाह्य जडीसभ[सम्पादन करी]

एहो सभ देखी[सम्पादन करी]