वेद
दिखावट
| वेद | |
|---|---|
चारि वेद | |
| जानकारी | |
| धर्म | हिन्दु धर्म |
| भाषा | वैदिक संस्कृत |
| पद्य | २०,३७९ मन्त्रसभ |
|
हिन्दू धर्म |
| इतिहास · देवता |
| सम्प्रदाय · आगम |
| विश्वास आ दर्शनशास्त्र |
|---|
| पुनर्जन्म · मोक्ष |
| कर्म · पूजा · माया |
| दर्शन · धर्म |
| वेदान्त ·योग |
| शाकाहार · आयुर्वेद |
| युग · संस्कार |
| भक्ति {{हिन्दू दर्शन}} |
| ग्रन्थ |
| वेदसंहिता · वेदांग |
| ब्राह्मणग्रन्थ · आरण्यक |
| उपनिषद् · श्रीमद्भगवद्गीता |
| रामायण · महाभारत |
| सूत्र · पुराण |
| शिक्षापत्री · वचनामृत |
| सम्बन्धित विषय |
| दैवी धर्म · |
| विश्वमे हिन्दू धर्म |
| गुरु · मन्दिर देवस्थान |
| यज्ञ · मन्त्र |
| शब्दकोश · हिन्दू पर्व |
| विग्रह |
| पोर्टल: हिन्दू धर्म |
| हिन्दू मापन प्रणाली |
वेद विश्वक सभ धर्म ग्रन्थसभक पिता छी । वेद सँ ही साभार करि अन्य धर्मशास्त्रक पुस्तकसभ निर्माण कएल गेल अछि । वेद हिन्दूसभक सभसँ पैग ग्रन्थ छी । वेद शब्द संस्कृत भाषाक "विद्" धातु सँ बनल अछि जेकर अर्थ अछि : जान्नाइ, ज्ञान इत्यादि । वेद हिन्दू धर्मक प्राचीन पवित्र ग्रन्थसभक नाम छी । वेदसभक श्रुति सेहो कहल जाइत् अछि, किया की पहिले मुद्रणक व्यवस्था नै भेलासँ एकर एक दोसर सँ सुनिके सम्झना राखल गेल एही प्रकार वेद प्राचीन भारतक वैदिक कालक वाचिक/श्रुति = श्रवण परम्पराक अनुपम कृति छी जे पीढी दर पीढी चार-पाँच हजार वर्ष सँ चलि आएल रहल अछि। वेद ही हिन्दू धर्मक सर्वोच्च आ सर्वोपरि धर्मग्रन्थ छी ।
वेदसभक महत्व
[सम्पादन करी]वैदिक वाङ्मयक शास्त्रीय स्वरूप
[सम्पादन करी]कर्मकाण्डमे वर्गीकरण
[सम्पादन करी]वैदिक स्वर प्रक्रिया
[सम्पादन करी]चार वेद
[सम्पादन करी]चार उपवेद
[सम्पादन करी]चार वेदक चार उपवेद मानल जाइत् अछि:
- धनुर्वेद,
- गान्धर्ववेद,
- आयुर्वेद, आ
- अर्थवेद ।