दुर्गा खोटे
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दुर्गा खोटे Durga Khote | |
|---|---|
| जन्म | भिता लाड १४ जनवरी १९०५ |
| मृत्यु | २२ सितम्बर १९९१ (८६ वर्ष) |
| व्यवसाय |
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| सक्रिय वर्ष | सन् १९३१-१९८३ |
| परिवार | भिजु खोटे (भतिजा) शुभा खोटे (भतिजी) भावना बलसाभर (भतिज पोती) |
| सम्मान |
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दुर्गा खोटे भारतीय चलचित्र क्षेत्रक एक बहुप्रसिद्ध अभिनेत्री छी। ओ अनेक व्यवसायिक रूपसँ सफल चलचित्रसभमे शानदार अभिनय केलक। प्रारम्भिक चलचित्रसभमे नायिकाक भूमिकाक बाद जखन ओ चरित्र अभिनेत्रीक भूमिकामे दर्शकक समक्ष आएल, तखनेसँ हुनकर बेजोड़ अभिनय केर आजुक दिनधरि लोकसभ याद करैत अछि।
व्यक्तिगत जीवन
[सम्पादन करी]दुर्गा खोटेक बाल्यकाल सामान्य रूपमे बितल मुदा अपन पोसन्दक विवाहक बादो हिनकर गृहस्थ जीवन बहुत कठिन आ दुःखसँ भरल रहल। दुर्गा अपन पतिद्वारा बहुत परेशान छलीह, मुदा ओ अप्पन बच्चासभ सँ जे खुशी पाबि रहल छलीह, ओ अपन बच्चासभ सँ पाबि रहल छलीह। ओ अपन पतिकेँ जीवन भरि अपना सङ्ग रखलनि। अप्पन आत्मकथा 'मी दुर्गा खोटे' (अनुवाद 'हम दुर्गा खोटे') मे ओ अपन जीवनक मार्मिक घटनाक विस्तृत विवरण देलनि अछि।
प्रमुख चलचित्रसभ
[सम्पादन करी]| वर्ष | चलचित्र | चरित्र | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| १९८३ | दौलत के दुश्मन | ||
| १९८० | कर्ज़ | शान्ता प्रसाद वर्मा | |
| १९७७ | पहेली | ब्रिजमोहन की माँ | |
| १९७७ | डार्लिंग डार्लिंग | ||
| १९७७ | पापी | अशोक की माँ | |
| १९७७ | चोर सिपाही | ||
| १९७७ | साहेब बहादुर | ||
| १९७७ | चाचा भतीजा | ||
| १९७६ | शक | ||
| १९७६ | रंगीला रतन | ||
| १९७६ | जानेमन | ||
| १९७६ | जय बजरंग बली | ||
| १९७५ | खुशबू | ||
| १९७५ | चैताली | ||
| १९७५ | काला सोना | ||
| १९७४ | विदाई | पार्वती | |
| १९७३ | अग्नि रेखा | ||
| १९७३ | बॉबी | मिसेज़ ब्रैगैन्ज़ा | |
| १९७३ | अभिमान | ||
| १९७२ | बावर्ची | ||
| १९७२ | राजा जानी | ||
| १९७१ | बनफूल | ||
| १९७१ | एक नारी एक ब्रह्मचारी | ||
| १९७० | खिलौना | ठकुराइन सूरज सिंह | |
| १९७० | गोपी | ||
| १९७० | आनन्द | ||
| १९६९ | जीने की राह | पार्वती | |
| १९६९ | धरती कहे पुकार के | ||
| १९६९ | प्यार का सपना | ||
| १९६८ | सपनों का सौदागर | ||
| १९६८ | संघर्ष | ||
| १९६८ | झुक गया आसमाँ | दादी माँ | |
| १९६७ | चन्दन का पालना | ||
| १९६६ | प्यार मोहब्बत | ||
| १९६६ | अनुपमा | अशोक की माँ | |
| १९६६ | सगाई | ||
| १९६६ | दादी माँ | ||
| १९६५ | काजल | रानी साहिबा | |
| १९६४ | कैसे कहूँ | ||
| १९६४ | दूर की आवाज़ | ||
| १९६४ | बेनज़ीर | ||
| १९६३ | मुझे जीने दो | ||
| १९६२ | मनमौजी | ||
| १९६२ | मैं शादी करने चला | ||
| १९६१ | भाभी की चूड़ियाँ | ||
| १९६० | पारख | ||
| १९६० | मुगल-ए-आज़म | महारानी जोधा बाई | |
| १९६० | उसने कहा था | ||
| १९५९ | अर्द्धांगिनी | ||
| १९५७ | भाभी | ||
| १९५६ | राजधानी | ||
| १९५४ | लकीरें | ||
| १९५४ | मिर्ज़ा गालिब | ||
| १९५३ | शिकस्त | ||
| १९५२ | आँधियां | ||
| १९५२ | मोरद्वाज | ||
| १९५१ | आराम | सीता | |
| १९५१ | सज़ा | ||
| १९५० | बेकसूर | ||
| १९५० | निशाना | ||
| १९४९ | सिंगार | ||
| १९४९ | जीत | ||
| १९३५ | इन्कलाब |