महाराणा प्रताप

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महाराणा प्रताप
Maharana Pratap
RajaRaviVarma MaharanaPratap.jpg
राजा रवि वर्माद्वारा कएल गेल महाराणा प्रतापक छवि
मेवाड़क महाराणा
राज्या काल २८ फरवरी १५७२ - २९ जनवरी १५९७
पुर्वाधिकारी उदय सिंह द्वितीय
उत्तराधिकारी अमर सिंह प्रथम
जीवनसाथी महरानी अजाब्दे (सहचारी)
१० अन्य पत्नी[१]
समस्या अमर सिंह प्रथम
भगवान दास
पिता उदय सिंह द्वितीय
माता जैवन्ता बाई
जन्म (१५४०-०५-०९)९ मई १५४०
कुम्भलगढ किला, राजस्थान[२]
देहान्त २९ जनवरी १५९७(१५९७-०१-२९) (५६ वर्ष)
चावन्द
दफन वान्दोली गाममे अन्तिम संस्कार
धर्म हिन्दू

महाराणा प्रताप सिंह (जेठ शुक्ल तृतीया रविदिन विक्रम सम्वत १५९७ तदानुसार ९ मई १५४०–१९ जनवरी १५९७) उदयपुर, मेवाडमे शिशोदिया राजवंशक राजा छल । हुनकर नाम इतिहासमे वीरता आ दृढ प्रणक लेल अमर अछि । ओ कयन वर्षधरि मुगल सम्राट अकबरक संग सङ्घर्ष केनए छल । महाराणा प्रताप सिंहद्वारा मुगलसभकें कयन बेर युद्धमे पराजित केनए छल । प्रतापक जन्म राजस्थानक कुम्भलगढमे महाराणा उदयसिंह आ माता जैवन्ता बाईक घर भेल छल ।[३][४][५] सन् १५७६ के हल्दीघाटी युद्धमे २०,००० राजपूतसभक संग राणा प्रतापद्वारा मुगल सरदार राजा मानसिंहक ८०,००० सेनाकें सामना केनए छल । शत्रु सेनासँ घेरल महाराणा प्रतापकें झाला मानसिंह अपन प्राण द सुरक्षित केलक आ महाराणाकें युद्ध भूमि छोड़ क लेल कहलक । शक्ति सिंह अपन अशव द महाराणाके बचेलक । प्रिय अश्व चेतकक सेहो मृत्यु भेल । ई युद्ध तँ मात्र एक दिन चलल मुदा ई युद्धमे १७,००० लोक मारल गेल । मेवाड़ जीतवाक लेल अकबर हर सम्भव प्रयास केलक ।

जीवनी[सम्पादन करी]

महाराणा प्रतापक जन्म कुम्भलगढ किलामे भेल छल । महाराणा प्रतापक माताक नाम जैवन्ताबाई छल, जे पालीक सोनगरा अखैराजक पुत्री छल । महाराणा प्रतापक बचपनमे कीका नाम सँ पुकारल जाइत छल । महाराणा प्रतापक राज्याभिषेक गोगुन्दामे भेल छल ।

हल्दीघाटीक युद्ध[सम्पादन करी]

ई युद्ध सन् १५७६ जुन १८ मे मेवाड तथा मुगलसभक बीच भेल छल । ई युद्धमे मेवाडक सेनाक नेतृत्व महाराणा प्रताप केनए छल । ई युद्धमे महाराणा प्रतापक दिस सँ युद्ध कएनिहार एकमात्र मुस्लिम सरदार छल -हकीम खाँ सूरी ।

ई युद्धमे मुगल सेनाक नेतृत्व मानसिंह तथा आसफ खाँ केनए छल । ई युद्धक प्रत्यक्ष दर्शी वर्णन अब्दुल कादिर बदायूनीद्वारा कएल गेल छल । ई युद्धकें आसफ खाँ अप्रत्यक्ष रूपसँ जेहाद क संज्ञा देलक । ई युद्धमे बिन्दाक झालामान अपन प्राणक बलिदान द महाराणा प्रतापक जीवनकें रक्षा केलक । कयन ग्वालियर नरेश 'राजा रामशाह तोमर' सहित अपन तीन पुत्र 'कुँवर शालीवाहन', 'कुँवर भवानी सिंह 'कुँवर प्रताप सिंह' आ पौत्र बलभद्र सिंह आ हजारो वीर तोमर राजपूत योद्धासभ समेत चिरनिद्रामे सुति गेल ।[१]

इतिहासकार मानैत अछि कि ई युद्धमे कियो विजय नै भेल मुदा देखल जाए तँ ई युद्धमे महाराणा प्रताप सिंह विजय भेल कियाकी अकबरक विशाल सेनाक अगाडी मुट्ठीभर राजपूत कतेक देर धरि टिक सकैत छल मुदा एना नै भ सकल आ ई युद्ध पूरे एक दिन चलल आ राजपूतसभद्वारा मुगलसभक छक्का छोडेनाए छल ।

सफलता आ अवसान[सम्पादन करी]

सन्दर्भ सामग्रीसभ[सम्पादन करी]

  1. १.० १.१ राना, भवन सिंह (2004). Maharana Pratap [महाराना प्रताप]. डायमंड पोकेट बुक्स. pp. 28, 105. आइएसबिएन 9788128808258. http://books.google.co.uk/books?id=K0UnRk-rRa4C. 
  2. Köpping, Klaus-Peter; Leistle, Bernhard; Rudolph, Michael, सं (2006). Ritual and Identity: Performative Practices as Effective Transformations of Social Reality. LIT Verlag Münster. प॰ 286. आइएसबिएन 978-3-82588-042-2. https://books.google.co.uk/books?id=BkBh1Nl4dHwC&pg=PA286. 
  3. Rana 2004, pp. 28, 105.
  4. Sarkar, Jadunath (1994). A History of Jaipur. प॰ 48. आइएसबिएन 978-8-12500-333-5. 
  5. Daryanani, Mohan B. (1999). Who's who on Indian Stamps. प॰ 302. आइएसबिएन 978-8-49311-010-9. 

बाह्य जडीसभ[सम्पादन करी]

एहो सभ देखी[सम्पादन करी]