धनतेरस

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धनतेरस
धनतेरस
समुदाय हिन्दुसभ
प्रकार धार्मिक, भारतनेपाल
महत्व धनवन्तरीक पूजा
पावनिसभ बहुमुल्य धातुक खरिद
तिथि कृष्ण त्रयोदशी
२०१६ मे २८ अक्टुबर
२०१७ मे १७ अक्टुबर[१]
मानाएल वार्षिक

कार्तिक कृष्ण पक्षक त्रयोदशी तिथिके दिन भगवान धनवन्तरीक जन्म भेल छल ताहि खातिर अही तिथि कऽ धनतेरस या धनत्रयोदशीके नामसं जानल जाईत अछि। भारत सरकार धनतेरस कऽ राष्ट्रिय आयुर्वेद दिवसके रूपमे मनेबाक निर्णय केनए अछि।[२]

प्रथा[सम्पादन करी]

धन्वन्तरी जब प्रकट भेल छलाह ओही समयमे हुन्कर हाथमे अमृतसं भरल कलश छल। भगवान धन्वन्तरि जाए कलश लकऽ प्रकट भेल छल ताही दुवारे यी अवसर पऽ बर्तन खरीदैक परम्परा अछि। बहुतो ठाम लोकमान्यताके अनुसार इहो कहल जाइत अछि कि अही दिन धन (वस्तु) खरीदलासं ओहीमऽ तेरह गुणा वृद्धि होइत अछि। अही अवसर पऽ लोग धनियाके बीया खरीद कऽ सेहो घरमे राखैत अछि। दीपावलीके पश्चात यी बीज/बिया कऽ लोगसभ अपन-अपन खेतमे रोपैत अछि।

धनतेरसके दिन चान्दी खरीदै कऽ सहो प्रथा अछि। अगर सम्भव नै भेला प्ऽ कोनो बर्तन खरिद करैत अछि। एकर यी कारण मानल जाइत छै कि यी चन्द्रमाक प्रतीक होइत अछि जे शीतलता प्रदान करैत छै आर मनमे सन्तोष रूपी धनक वास होइत छै। सन्तोष सबसं बड़का धन कहल गेल अछि। जकरा लऽ सन्तोष अछि ओ स्वस्थ अछि सुखी अछि आर व्याह सबसं धनवान होइत अछि । भगवान धन्वन्तरि जे चिकित्साके देवता सेहो छी हुनकासं स्वास्थ्य आर सेहतक कामनाके लेल सन्तोष रूपी धनसं बड़का कोनो धन नइ छै। लोगसभ अही दिन दीपावली कऽ राति लक्ष्मी गणेशक पूजा हेतु मूर्ति सेहो खरीद करैत अछि। धनतेरसक साझ घरके बाहर मुख्य द्वार पऽ आर अङनामे दीप जलाबऽक प्रथा सहो अछि।

सन्दर्भ सामग्रीसभ[सम्पादन करी]

बाह्य जडीसभ[सम्पादन करी]

एहो सभ देखी[सम्पादन करी]