होली

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होली
रंगक पावनि
होली रंगक पावनि
होली खेलैत, उटाह अमेरिकामे
आधिकारिक नाम होली
अन्य नाम फगुवा .
प्रकार हिन्दु
अनुष्ठान होलीक पहिल राति: होलीका दहन
होलीक दिन: अबीर रङ्ग लगेनाए, नाच गान होएत
तिथि फागु पूर्णिमा
२०१७ मे सोमदिन, १३ मार्च[१]
२०१८ मे शुक्रदिन, २ मार्च
२०१९ मे वृहस्पति दिन, २१ मार्च
मानाएल बार्षिक
समबन्ध नेपाल, भारत

होली (उच्चारण: /ˈhl/; संस्कृत: होली Holī) हिन्दू संस्कृतिमे हरेक वर्षक फागुन शुक्ल पूर्णिमा अर्थात होली पूर्णिमाक दिन मनाएल जाइत अछि । ई पावनि नेपाल][२], भारत[३] तथा अन्य राष्ट्रसभमे बैसैवला हिन्दूसभक एकटा महत्वपूर्ण पावनि छी । ई पावनि वसन्त ऋतुक फागुन मासमे मनाएल जाइत अछि । होलीमे नेपाली समुदायमे फागु पूर्णिमा[४] आ मिथिलामे फगुवाक नामसँ सेहो जानल जाइत अछि । होली रङ्गक पावनि छी । होलीक दिन सम्पूर्ण हिन्दूधर्मावलम्बी एक दोसरके विभिन्न प्रकार सँ रङ्ग आ अबीर लगबैत अछि । मिठाई आ पकवान ग्रहण करबैत अछि ।[५] होली पावनि मनेवाक पाछा एकटा आओर कारण इतिहास छी । एकटा जनविश्वास अछि जे होलीक दिन पुरान कटुता समाप्त कए आ दुश्मनी सेहो बिसैर लोकसभ एक-दोसर सँ भेंट करैत अछि ।[६] होली पावनि घरपरिवार-साथीभाई आपसमे रङ्ग लगाए उल्लासपूर्वक फागुन पूणिर्माक अवसरमे पहाड़सँ, तराई आर गाम आ शहरधरि बच्चा, युवा, युवती तथा प्रौढसभक हूल तथा जत्थासभ हातमे रङ्ग आ रङ्गीन घोल पदार्थ लऽ गीत गावैत, बजावैत, मनोरञ्जन होहल्ला करैत आपसी रिसराग छोड़िक उत्साह आ उमङ्गक साथ मनबैत अछि ।

होली खेलैत बालिका

इतिहास[सम्पादन करी]

होलीक बारेम पौराणिक भनाइ अनुसार प्राचीन समयमा अथवा सत्य युगमे नास्तिक हिरण्यकश्यपु नामक एक गोटे राक्षसक जन्म भेल छल । हिरण्यकश्यपुक भगवान विष्णु नृसिंह अवतारम प्रकट भक संघहार केलक । हिरण्यकश्यपुक सुपुत्र भक्त प्रह्लाद छल । भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णुक निक भक्त छल । अपन पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णुक भजन करैत हिरण्यकश्यपुक रास नै भेल । अहिल ओ राजा प्रह्लादक मारक लेल योजनासभ बनावैत छल । एक योजना अनुसार हिरण्यकश्यपु पुत्रके अग्निकुण्डमे फेक माइर अपन बहिन होलिका(जे अग्निसँ नै डहत वरदान भेटल छल)क जिम्मा देलक । हिरण्यकश्यपुक आदेशानुसार होलिका प्रह्लादक काखम लक अग्निम वैठ आगनि धर्मक साथ देलक होलिका डहैक नष्ट भेल प्रह्लादक किछ नै भेल । होलिका दहनक खुसियाली मनाओल आपसमा रङ्ग आ अविरक होली पावनि मनावैक परम्परा चलल धार्मिक मान्यता रहि गेल अछि । तहिना दोसर एक प्रसङ्ग अनुसार द्वापर युगम श्रीकृष्णक मार् उद्देश्य सँ दूध पिलावै गेल कंशक शेना पुतना नामक राक्षसनीक उल्टा कृष्ण मारिदेलक तहिद्वरा शवके ब्रजवासीहसभ अहि दिन जलाक आपसमा रङ्ग आर अबिर छरी खुसियाली मनाओलक वोहिक सम्झनामा अद्यावधिक चीरदाहक होली खेल्ल परम्परा चलल भनाइ अछि ।[७] होली हिन्दूसभक अत्यन्त प्राचीन पावनि छी । इतिहासकारसभ मानैत अछि कि ई पावनिक प्रचलन आर्यसभ सेहो छल । ई पावनिक वर्णन अनेक पुरातन धार्मिक पुस्तकसभमे भेटल जाइत अछि । नारद पुराणभविष्य पुराण जेहन प्राचीन हस्तलिपीसभमे ग्रन्थसभमे सेहो ई पावनिक उल्लेख कएल गेल अछि। भारतम विंध्यक्षेत्रको राम गढमर स्थानम स्थित ईसा सँ ३०० वर्ष पुरान एकटा अभिलेखम सेहो एकर उल्लेख कएल गेल अछि। संस्कृत साहित्यम वसन्त ऋतु आर वसन्तोत्सव अनेक कविसभक प्रिय विषय छल ।

नेपालम होली[सम्पादन करी]

फागु पुर्णिमा आ होली ई चाड नेपालम हर्शोल्लाशका साथ मनाओल जाइत अछि। होलीक एक दिन अगाडी साझ नेपालक बसन्तपुर दरबार अगाडि 'होलिका दहन'क ई चाडक सुरुवात होइत अछि। हिरण्यकश्यपुक बहिन होलिकाक बिष्णुके भक्त हिरण्यकश्यपुके सुपुत्र (प्रह्लाद) के मारि अग्नी नजिक जा होलिका पने जलिक नस्ट भेलाहक कारण असत्य माथि सत्यक जित भेल दिनक रुपमा ई पर्ब मनावैत अछि। हिन्दू धर्म मानेवालासभ बाहुल्यता भेल नेपालम होलीक रौनक पूर्व मेची सँ पश्चिम महाकाली धरि भब्य होइत अछि । नेपालम पहाडी क्षेत्रम फागु पुर्णिमाक दिन होली मनावैत् अछि तहिना वोकर बिहान मात्र तराइमा मनाओल जाइत अछि।नेपालक बिशेष शहरसभ काठमाडौं, पोखरा, धरान, चितवन, बिराटनगर, धनगढी लगायत ठामसभमे होलीक रौनक बहत फरक होईत अछि । बिशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमसभ ओही रङसभक बर्षासँ शहरक होली रमावैत अछि । नेपालक गाउसभमे सेहो होली भब्यताका साथ मनावैत अछि । होलीमे पानी फेकनाई, अबिर लगायत रङ लगेवाक चलन अछि। होली बिभिन्न प्रकारक बिक्रिती बिसंगती सेहो भेटल गेल अछि। होलीम आजुक युवासभ अण्डा फोड्न् , गाडीक मोबिल लगा , युवासभ मदिरा सेवन जेहन काम होइत अछि जेहन होइत अछि। नेपालक मुख्य शहरसभम होलीक लेल बिभिन्न ठामसभमे कडा सुरक्षा जांच होइत अछि।

सूदुर पश्चिमेली होली खेलक लय[सम्पादन करी]

गहिरिताल[सम्पादन करी]

  • रचो रचो हिमान्जल ब्याऊँ ॐ । ॐ । गौरा को ब्याउन शिव चले ।
  • कौन दिशाको माडा उँ । २
  • कौन दिशाको ब्याउँ — ॐ गौराको ब्याउन................
  • पश्चिम दिशाको माडाउँ । २
  • उत्तर दिशाको ब्याउँ — ॐ गौराको ब्याउन.............
  • कौन तिथिको वरत –२
  • कौन तिथिको ब्याँउँ ॐ गौराको ब्याँउन.......
  • एकादशि को वरत २
  • दुवादशी को ब्याँउँ ॐ गौराको ब्याउन.......

ताल धुमाल[सम्पादन करी]

  • मत् जाहो पिया होली, आय रही, मत जाहो पिया होली आय रही ।
  • आयो बशंत सवि बन फुले ।
  • ऐसि नयाँ ऋतु आँय रहि ।। मत् जाहो.......
  • मोर चकोर पपिया बोले ।
  • कोयल सयु(स्वर) सुनाय रहे ।। मत् जाहो .......
  • जिनके पिया परदेश वसंत है ।
  • उनकि नारी सोच रही ।। मत् जाहो ......
  • जिनके पिया नित धरपर बैठे ।
  • उनकि नारी रंग रहि मत जाहो ....
  • आवो गोरी खेलौं होली ।
  • रंग मे धुम उडाय रही ।। मत जाहो ......
  • जो । जो । तान मरे मुरली पर ।
  • सो । सो तान सुनाय रहि – मत जाहो ....

सुन्दर बर राम सलौना है–सुन्दर बर राम सलौना है[सम्पादन करी]

  • कौन पुरीको जन्म तुहारो (तुम्हारो) ।
  • कौन राजा का छौना है – सुन्दर वर.....
  • अवधपुरीको जन्म हमारो ।
  • राजा दशरथका छौना हौ – सुन्दर वर....
  • कौन के कोखि जनम लियो है ।
  • कौनले दुध पिलाया है – सुन्दरु वर.....
  • कौशिल्या कोखि जन्म हमारौ ।
  • सोमित्रा दुध पिलाया है – सुन्दर वर ....
  • काँहि के कारण जन्म तुम्हारो ।
  • कौन पुरीमे जाना है – सुन्दर वर..
  • रावण मारन जन्म हमारो ।
  • जनक पुरीमे जाना है – सुन्दर वर ...

भुज दशरथ नन्दन जनक लली—२[सम्पादन करी]

  • दशरथ पुत्र प्रकट भए है ।
  • राजा जनक कि भइ है लली – भजु...
  • सिता स्वयम्वर यज्ञ रचो है ।
  • बात चलि है धनुष कि वलि – भजु...
  • कठिन धनुष है शिव शंकर को ।
  • कठिन धनुष को खण्ड वलि – भजु...
  • सव देशनके भुपति आए ।
  • राजा जनक के द्धार वली– भजु..
  • विश्वामित्र जनक पुर आए ।
  • संग लिए रघुनाथ वलि, –भजु
  • वाँया करसे धनुष उठाए ।
  • कठिन धनुष को खण्ड वलि – भजु....
  • सब देश के भुपती जोथे ।
  • धनुष न तोडी लजाय वलि– भजु ...

गहिरी[सम्पादन करी]

  • क— दीपक ज्योती वदन वरसो सिय सुन्दर चन्द्र सुरज लाए ।
  • ख— वर पाए – वर पाए रघुनाथ हरे । सीता परमेश्वर – वर पाए
  • धन्य धन्य सीता भाग्य तुमारो ।
  • रघुवरजैसे पतिपाए – सीतापरमेश्र वरपाए र
  • धन्य धन्य सीता भाग्य तुमारो ।
  • दशरथजैसे सशुरपाए –सीता परेमेश्वर पाए ।
  • धन्य धन्य सीता भाग्य तुमारो
  • कौशिल्याजैसी सासुपाए – सीतापरमेश्वर पाए
  • धन्य धन्य सीता भाग्य तुमारो
  • अयोध्याजैसी पुरीपाए –सीता परमेश्वर पाए ।
  • धन्य धन्य सीता भाग्य तुमारो
  • लक्ष्मणजैसे देवर पाए –सीता परमेश्पर पाए ।
  • धन्य धन्य सीता भाग्य तुमारो ।
  • सुग्रीवजैसे मितपाए – सीता परमेश्वर पाए ।
  • धन्य धन्य सीता भाग्य तुमारो ।
  • हनिमन्तजैसे दुतपाए– सीता परमेश्वर पाए ।


चित्र दीर्घा[सम्पादन करी]

सन्दर्भ सामग्रीसभ[सम्पादन करी]

  1. "Holidays in India, Month of March 2017", Government of India, अभिगमन तिथि १८ मार्च २०१६ 
  2. "Holi festivals of Nepalese" 
  3. The New Oxford Dictionary of English (1998) ISBN 0-19-861263-X - p.874 "Holi /'həʊli:/ noun a Hindu spring festival ...".
  4. "Date of Holi festival in Nepal and India as of Hindu Vikram Sambat Calendar" 
  5. http://www.thecolorsofindia.com/holi-celebrations.html
  6. : होली
  7. विभिन्न हिन्दू धार्मिक ग्रन्थहरू

बाह्य जडीसभ[सम्पादन करी]