मधुबनी, भारत

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मधुबनी
মধুবনী
Madhubani
शहर
मधुबनी बिहारपर अवस्थित
मधुबनी
मधुबनी
बिहारमे मधुबनीक स्थान
निर्देशाङ्क: २६°२२′N ८६°०५′E / २६.३७°N ८६.०८°E / 26.37; 86.08निर्देशाङ्क: २६°२२′N ८६°०५′E / २६.३७°N ८६.०८°E / 26.37; 86.08
देश भारत
राज्यबिहार
जिलामधुबनी
क्षेत्रमिथिला
उँचाई५६ मिटर (१८४ फिट)
जनसङ्ख्या (२००१)
 • सम्पूर्ण१,६६,२८५
भाषा
 • अधिकारिकमैथिली, हिन्दी
समय क्षेत्रभारतीय मानक समय (युटिसी+५:३०)
डाक कोड८४७२११
टेलिफोन कोड०६२७६
लैङ्गिक अनुपात१०००/९४२ /
लोकसभा क्षेत्रमधुबनी
विधानसभा क्षेत्रमधुबनी, बिसफी
वेबसाइटmadhubani.bih.nic.in


मधुबनी बिहार राज्यमे अवस्थित एगो शहर छी । ई मधुबनी जिलाक मुख्यालय छी ।

नामाकरण[सम्पादन करी]

मधुबनीक मुख्य भाषा मैथिली अछि जे सुनऽ मे मधुर आ सरस अछि। पहिलुका समयमे एतयके जङ्गलमे मौध (शहद) बेसी भेटैत छल ताहि लेल जगह का नाम मधु + वनी सँ मधुबनी भऽ गेल।[१] किछ लोकक मानब छै मधुबनी शब्द मधुर + वाणी सँ विकसित भेल अछि।

इतिहास[सम्पादन करी]

मधुबनी जिलाक प्राचीनतम ज्ञात निवासीमे किरात, भार, थारु एहेन जनजाती शामिल अछि । वैदिक स्रोतक अनुसार आर्यक विदेह शाखा आगिके संरक्षणमे सरस्वती तट सँ पूबमे सदानीरा (गण्डक)क आओर कूच केलथि आओर एहि क्षेत्रमे विदेह राज्यक स्थापना केलथि । विदेहक राजा मिथिके नाम पर ई प्रदेश मिथिला कहाओल । रामायणकालमे मिथिलाक राजा सिरध्वज जनकक पुत्री सीताक जन्म मधुबनीक सीमा पर स्थित सीतामढीमे भेल छल । विदेहक राजधानी जनकपुर, जे आधुनिक नेपाल मे पड़एत अछि, मधुबनीके उत्तर-पश्चिमी सीमाके लग अछि । बेनीपट्टीके लग स्थित फुलहरके बारेमे एहेन मान्यता अछि की एतय फुलक बाग छल जतय सँ सीता फुल लए कए गिरिजा देवी मन्दिरमे पूजा करैत छलीह । पण्डौलके बारेमे एहो प्रसिद्धि अछि की एतय पाण्डवसभ अपन अज्ञातवाशक किछु दिन बितेने छलाह । विदेह राज्यक अन्त भेला पर ई प्रदेश वैशाली गणराज्यक अङ्ग बनल । एकर बाद ई मगधक मौर्य, शुङ्ग, कण्व आ गुप्त शासक सभक अधीन रहल । १३हम शताब्दीमे पश्चिम बङ्गालक मुसलमान शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियासक समय मिथिला आ तिरहुत क्षेत्रक बँटवारा भऽ गेल । उत्तरी भाग जाहिके अन्तर्गत मधुबनी, दड़िभङ्गा आ समस्तीपुरक उत्तरी हिस्सा आएल छल, ओईनवार राजा कामेश्वर सिंहक महान शासन व्यवस्थामे रहल । ओईनवार राजासभ मधुबनीके लगमे रहल सुगौनाके अपन पहिल राजधानी बनेलथि । १६हम शताब्दीमे ओ सब दड़िभङ्गाक अपन राजधानी बनेलथि । ओईनवार राजा सभक कला, संस्कृति आया साहित्यके बढ़ावा दिअ लेल जानल जाएत अछि । १८४६ इस्वीमे ब्रिटिश सरकार मधुबनीकें तिरहुतक अधीन अनुमण्डल बनेलक । सन् १८७५ मे दड़िभङ्गाके स्वतन्त्र जिला बनला पर ई एकर अनुमण्डल बनल । स्वतन्त्रता सङ्ग्राममे महात्मा गान्धीक खादी आन्दोलनमे मधुबनी अपन विशेष पहिचान कायम केलक आओर सन् १९४२ मे भारत छोड़ो आन्दोलनमे जिलाक सेनानी सभ जीजान सँ हिस्सा लेलक । स्वतन्त्रताक पश्चात सन् १९७२ मे मधुबनीकें स्वतन्त्र जिला बना देल गेल ।

भौगोलिक स्थिति[सम्पादन करी]

मधुबनी शहरक उत्तरमे नेपाल, दक्षिणमे दड़िभङ्गा, पुरबमे सुपौल तथा पश्चिममे सीतामढी जिला अछि । ई शहरक कुल क्षेत्रफल ३५०१ वर्ग किलोमिटर अछि । नदिसभ सँ भरल ई स्थान बरसातक दिनसभमे प्रति वर्ष लोकसभक लेल तबाहीक कारण बनैत अछि । सन् २००७ मे आएल भीषण बाढ़िमे ३३१ पञ्चायत (११० पूर्ण रूप सँ तथा २२१ आंशिक रुप सँ) तथा ८३६ गामसभक ३,७२,५९९ परिवार पूर्ण रूप सँ प्रभावित भेल छल ।[२] समूचा जिला एक समतल आ उपजाऊ क्षेत्र छी । औसत वार्षिक १,२७३ मिमी वर्षा अधिकांश मनसुन सँ प्राप्त होइत अछि ।

नदीसभ[सम्पादन करी]

मधुबनीमे कमला, करेह, बलान, भूतही बलान, गेहुंआ, सुपेन, त्रिशुला, जीवछ, कोशी आ अधवारा समूह। अधिकांश नदियाँ बरसात के दिनों में उग्र रुप धारण कर लेती है। कोशी नदी जिले की पूर्वी सीमा तथा अधवारा या छोटी बागमती पश्चिमी सीमा बनाती है।

प्रशासनिक विभाजन[सम्पादन करी]

यह जिला ५ अनुमंडल, २१ प्रखंडों, ३९९ पंचायतों तथा ११११ गाँवों में बँटा है। विधि व्यवस्था संचालन के लिए १८ थाने एवं २ जेल है। पूर्ण एवं आंशिक रुप से मधुबनी जिला २ संसदीय क्षेत्र एवं ११ विधान सभा क्षेत्र में विभाजित है।

  • अनुमंडल- मधुबनी, बेनीपट्टी, झंझारपुर, जयनगर एवं फुलपरास
  • प्रखंड- मधुबनी सदर (रहिका), पंडौल, बिस्फी, जयनगर, लदनिया, लौकहा, झंझारपुर, बेनीपट्टी, बासोपट्टी, राजनगर, मधेपुर, अंधराठाढ़ी, बाबूबरही, खुटौना, खजौली, घोघरडीहा, मधवापुर, हरलाखी, लौकही, लखनौर, फुलपरास, कलुआही

कृषि एवं उद्योग[सम्पादन करी]

मधुबनी मूलतः एक कृषि प्रधान जिला है। यहाँ की मुख्य फसलें धान, गेहूं, मक्का, मखाना आदि है। भारत में मखाना के कुल उत्पादन का ८०% मधुबनी में होता है।[३] आधारभूत संरचना का अभाव एवं निम्न शहरीकरण (मात्र 3.65%) उद्योगों के विकाश में बाधा है। अभी मधुबनी पेंटिंग की 76 पंजीकृत इकाईयाँ, फर्नीचर उद्योग की 13 पंजीकृत इकाईयाँ, 3 स्टील उद्योग, 03 प्रिंटिंग प्रेस, 03 चूरा मिल, 01 चावल मिल तथा 3000 के आसपास लघु उद्योग इकाईयाँ जिले में कार्यरत है। पशुपालन एवं डेयरी को आधार बनाकर इनपर आधारित उद्योग लगाया जा सकता है लेकिन अभी तक मात्र ३० दुग्ध समीतियाँ ही कार्यरत है। मछली, मखाना, आम, लीची तथा गन्ना जैसे कृषि उत्पाद के अलावे मधुबनी से पीतल की बरतन एवं हैंडलूम कपड़े का राज्य में तथा बाहर निर्यात किया जाता है।

शैक्षणिक संस्थान[सम्पादन करी]

शिक्षा के प्रसार के मामले में मधुबनी एक पिछड़ा जिला है। साक्षरता मात्र 41.97% है जिसमें स्त्रियों की साक्षरता दर महज 26.54% है। आधारभूत संरचना के अभाव को शिक्षा क्षेत्र में पिछड़ेपन का मुख्य कारण माना जाता है। जिले में शिक्षण संस्थानों की कुल संख्या इस प्रकार है:

  • प्राथमिक विद्यालयः 901
  • मध्य विद्यालयः 382
  • माध्यमिक विद्यालयः 119
  • डिग्री कॉलेजः 27

स्थिति में सुधार हेतु बिहार शिक्षा परियोजना के अधीन अभी 98 प्राथमिक विद्यालय खोले गए हैं तथा 83 प्राथमिक विद्यालयों को मध्य विद्यालय में उत्क्रमित किया जा रहा है। मधुबनी जिले के तमाम कॉलेज ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा से संवद्ध हैं जबकि आबादी को देखते हुए जिले में एक विश्वविद्यालय की सख्त आवश्यकता है। इसके अलावा यहां मेडिकल कॉलेज और अन्य इंजीनियरिंग कॉलेज भी नहीं है। मधुबनी के लोग पढ़ाई लिखाई में काफी जहीन माने जाते हैं और उन्होंने राज्य और देश के अंदर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कम साक्षरता के बावजूद यहां के लोग बड़ी संख्या में आईएएस, आईपीएस और अन्य सेवाओं में चुनकर जाते रहे हैं। लेकिन पढ़ वहीं पाते हैं जो आर्थिक रुप से संपन्न हैं और जुनूनी है साथ ही जिनका जागरुक समाजिक परिवेश है। मधुबनी में वैसे तो एक नवोदय विद्यालय है लेकिन उसकी गुणवत्ता प्रभावित हुई है। मधुबनी को कम से कम ५ डिग्री कॉलेज, एक मेडिकल कॉलेज और पांच इंजिनयरींग कॉलेजों की सख्त आवश्यकता है। यहां के बच्चे जमीन बेचकर कर्नाटक, महाराष्ट्र और अन्य सूबों में डिग्री पाने जाते हैं जिसकी गुणवत्ता भी संदिग्ध होती है साथ ही राज्य का राजस्व भी दूसरे राज्य में चला जाता है। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि इस जिले से इतने कद्दावर नेताओं के संसद और विधानसभा पहुंचने के बाद भी जनता को ठगने का सिलसिला जारी है और शिक्षा अभी तक राजनीतिक एजेंडे पर नहीं आ पाई है। शायद देश के अन्य हिस्सों का भी कमोवेश यहीं हाल है।

कला एवं संस्कृति[सम्पादन करी]

मधुबनी मिथिला संस्कृति का अंग एवं केंद्र विंदु रहा है। राजा जनक और सीता का वास स्थल होने से हिंदुओं के लिए यह क्षेत्र अति पवित्र एवं महत्वपूर्ण है। मिथिला पेंटिंग के अलावे मैथिली और संस्कृत के विद्वानों ने इसे दुनिया भर में खास पहचान दी है। प्रसिद्ध लोककलाओं में सुजनी (कपडे की कई तहों पर रंगीन धागों से डिजाईन बनाना), सिक्की-मौनी (खर एवं घास से बनाई गई कलात्मक डिजाईन वाली उपयोगी वस्तु) तथा लकड़ी पर नक्काशी का काम शामिल है। सामा चकेवा एवं झिझिया मधुबनी का लोक नृत्य है। मैथिली, हिंदी तथा उर्दू यहाँ की मुख्‍य भाषा है। यह जिला महाकवि कालीदास, मैथिली कवि विद्यापति तथा वाचस्पति जैसे विद्वानों की जन्मभूमि रही है।

मधुबनी पेंटिंगः

पर्व त्योहारों या विशेष उत्सव पर यहाँ घर में पूजागृह एवं भित्ति चित्र का प्रचलन पुराना है। १७वीं शताब्दी के आस-पास आधुनिक मधुबनी कला शैली का विकास माना जाता है। मधुबनी शैली मुख्‍य रुप से जितवारपुर (ब्राह्मण बहुल) और रतनी (कायस्‍थ बहुल) गाँव में सर्वप्रथम एक व्‍यवसाय के रूप में विकसित हुआ था। यहाँ विकसित हुए पेंटिंग को इस जगह के नाम पर ही मधुबनी शैली का पेंटिग कहा जाता है। इस पेंटिग में पौधों की पत्तियों, फलों तथा फूलों से रंग निकालकर कपड़े या कागज के कैनवस पर भरा जाता है। मधुबनी पेंटिंग शैली की मुख्‍य खासियत इसके निर्माण में महिला कलाकारों की मुख्‍य भूमिका है। इन लोक कलाकारों के द्वारा तैयार किया हुआ कोहबर, शिव-पार्वती विवाह, राम-जानकी स्वयंवर, कृष्ण लीला जैसे विषयों पर बनायी गयी पेंटिंग में मिथिला संस्‍कृति की पहचान छिपी है। पर्यटकों के लिए यहाँ की कला और संस्‍कृति खासकर पेंटिंग कौतुहल का मुख्‍य विषय रहता है। मैथिली कला का व्‍यावसायिक दोहन सही मायने में १९६२ में शुरू हुआ जब एक कलाकार ने इन गाँवों का दौरा किया। इस कलाकार ने यहां की महिला कलाकारों को अपनी पेंटिंग कागज पर उतारने के लिए प्रेरित किया। यह प्रयोग व्‍यावसायिक रूप से काफी कारगर साबित हुई। आज मधुबनी कला शैली में अनेकों उत्‍पाद बनाए जा रहे हैं जिनका बाजार फैलता ही जा रहा है। वर्तमान में इन पेंटिग्‍स का उपयोग बैग और परिधानों पर किया जा रहा है। इस कला की मांग न केवल भारत के घरेलू बाजार में बढ़ रही है वरन विदेशों में भी इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। अन्य उत्पादों में कार्ड, परिधान, बैग, दरी आदि शामिल है।

चित्रकला[सम्पादन करी]

मधुबनी चित्रकला के लिए प्रख्यात है। 2003 ई॰ में लन्दन में आयोजित कला प्रदर्शनी में मधुबनी पेंटिंग्स को बहुत प्रशंसा मिली थी।

पर्यटन स्थल[सम्पादन करी]

*राजनगर- राजनगर मधुबनी जिले का एक एतिहासिक महत्व जगह है। यह एक जमाने में महाराज दरभंगा की उप-राजधानी हुआ करता था। यह मराराजा रामेश्वर सिंह के द्वारा बसाया गया था। उन्होंने यहां एक भव्य नौलखा महल का निर्माण करवाया लेकिन १९३४ के भूकंप में उस महल को काफी क्षति पहुंची और अभी भी यह भग्नावशेष के रुप में ही है। इस महल में एक प्रसिद्ध और जाग्रत देवी काली का मंदिर है जिसके बारे में इलाके के लोगों में काफी मान्यता और श्रद्धा है। जब इस नगर को रामेश्वर सिंह बसा रहे थे उस वक्त वे महाराजा नहीं, बल्कि परगने के मालिक थे। राजा के छोटे भाई और संबंधियों को परगना दे दिया जाता था जिसके मालिक को बाबूसाहब कहा जाता था। बाद में अपने भाई महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह की मृत्यु के बाद, रामेश्वर सिंह, दरभंगा की गद्दी पर बैठे। लेकिन १९३४ के भूकंप ने राजनगर के गौरव को ध्वस्त कर दिया। हलांकि यहां का भग्नावशेष अवस्था में मौजूद राजमहल और परिसर अभी भी देखने लायक है। राजनगर, मधुबनी जिला मुख्यालय स करीब ७ किलोमीटर उत्तर में है और मधुबनी-जयनगर रेलवे लाईन यहां से होकर गुजरती है। यह मधुबनी-लौकहा रोड पर ही स्थिति है और यातायात के साधनों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहां प्रखंड मुख्यालय, कॉलेज, हाईस्कूल, पुलिस स्टेशन, सिनेमा हॉल आदि है। एक जमाने में नदी कमला इसके पूरव से होकर बहती थी। अब उसने अपनी धारा करीब ७ किलोमीटर पूरव खिसका ली है और भटगामा-पिपराघाट से होकर बहती है। राजनगर से उत्तर खजौली, दक्षिण मधुबनी, पूरव बाबूबरही और पश्चिम रहिका ब्लाक है। यहां से बलिराजगढ़ की दूरी २० किलोमीटर है, जो मौर्यकाल से भी पुराना ऐतिहासिक किला माना जाता है।

  • सौराठ: मधुबनी-जयनगर रोड पर स्थित इस गाँव में सोमनाथ महादेव मंदिर का मंदिर है। यहाँ मैथिल ब्राह्मणों की प्रतिवर्ष होनेवाली सभा में विवाह तय किए जाते हैं। इस गाँव में तथा अन्यत्र रहने वाले पंजीकार इस क्षेत्र के ब्राह्मणों की वंशावली रखते हैं और विवाह तय करने में इनकी अहम भूमिका होती है।
  • कपिलेश्वरनाथ: मधुबनी से ९ किलोमीटर दूर इस स्थान पर अति पूज्य कपिलेश्वर शिव मंदिर है। प्रत्येक सोमवार तथा सावन के महीने में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा होती है। महाशिवरात्रि को यहाँ मेला भी लगता है।
  • बाबा मुक्तेश्वरनाथ स्थान: भगवान शिव को समर्पित श्री श्री १०८ बाबा मुक्तेश्वरनाथ (मुक्तेश्वर स्थान) शिव मंदिर एक हिन्दू धर्म - स्थल है जो बिहार राज्य के मधुबनी जिला अन्तर्गत्त अंधराठाढ़ी प्रखंड के देवहार ग्राम में स्थित है।
  • उचैठा: बेनीपट्टी प्रखंड में थुमने नदी के पश्चिमी किनारे पर देवी भगवती का मंदिर है। जनश्रुतियों के अनुसार यहाँ संस्कृत कवि एवं विद्वान कालीदास को देवी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ था।
  • भवानीपुर: पंडौल प्रखंड मुख्यालय से ५ किलोमीटर दूर स्थित इस गाँव में उग्रनाथ महादेव (उगना) शिव मंदिर है। बिस्फी में जन्में मैथिली के महान कवि विद्यापति से यह मंदिर जुड़ा है। मान्यताओं के अनुसार विद्यापति शिव के इतने अनन्य भक्त थे कि स्वयं शिव ने ही उगना बनकर उनकी सेवा करने लगे।
  • कोइलख'- कोइलख एक प्रमुख गाँव है जो माँ काली के लिए प्रसिद्ध है यहाँ जो मनोकामना मांगी जाती है वो जरुर पूरी होती है .मधुबनी जिले के राजनगर प्रखण्ड के कोइलख गाँव स्थित भद्रकाली भगवती परम सुविख्यात हैं।यहाँ भव्य मंदिर के गर्भगृह मे शक्ति विग्रह भद्रकाली के रूप मे सुन्दर रजत मुकुट धारण कर पिठिका पर भगवती विराजमान हैं।भगवती को लोग कोकिलाक्षी के रूप मे भी पूजते हैं। कोकिलाक्षी के नाम पर ही इस गाँव का नाम कोइलख पड़ा। ये अति प्राचीन काल से पूजित होती आयी हैं। इसका अपना एतिहासिक पृष्ठभूमि भी रहा है। कहा जाता है कि 11वीं शताब्दी के अंत मे राजपूत कल्चूरी सेनापति नाथ देव ने मदनपाल (गौड़वासव) पर चढ़ाई के क्रम मे वासुदेव की सिद्धभूमि वासुदेवपुर(वर्तमान कोइलख) मे छावनी बनाया।वहीं के सिद्धनाथ झा के आशिर्वाद से नाथ देव इसमे सफल हुए। उस स्थान पर सजे हुए रथ (कल्याक्ष) रखे थे इस कारण इस भूमि स्थित देवी को कोकिलाक्षी अर्थात भद्रकाली एवं वासुदेवपुर को कोइलख कहा जाने लगा।

* बलिराज गढ़ : यहां प्रचीन किला का एक भग्नावशेष है जो करीब ३६५ बीघे में फैला हुआ है। यह स्थान जिला मुख्यालय से करीब ३४ किलोमीटर उत्तर-पूर्व में मधुबनी-लौकहा सड़के के किनारे स्थित है। यह नजदीकी गांव खोजपुर से सड़क मार्ग से जुड़ा है जहां से इसकी दूरी १। ५ किलोमीटर के करीब है। इसके उत्तर में खोजपुर, दक्षिण में बगौल, पूरब में फुलबरिया और पश्चिम में रमणीपट्टी गांव है। इस किले की दीवार काफी मोटी है और ऐसा लगता है कि इसपर से होकर कई रथ आसानी से गुजर जाते होंगे। यह स्थान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है और यहां उसके कुछ कर्मचारी इसकी देखभाल करते हैं। पुरातत्व विभाग ने दो बार इसकी संक्षिप्त खुदाई की है और इसकी खुदाई करवाने में मधुबनी के पूर्व सीपीआई सांसद भोगेंद्र झा और स्थानीय कुदाल सेना के संयोजक सीताराम झा का नाम अहम है। यहां सलाना रामनवमी के अवसर पर चैती दुर्गा का भव्य आयोजन होता है जिसमें भारी भीड़ उमड़ती है। इसकी खुदाई में मौर्यकालीन सिक्के, मृदभांड और कई वस्तुएं बरामद हुई हैं। लेकिन पूरी खुदाई न हो सकने के कारण इसमें इतिहास का वहुमूल्य खजाना और ऐतिहासिक धरोहर छुपी हुई है। कई लोगों का मानना है कि बलिराज गढ़ मिथिला की प्राचीन राजधानी भी हो सकती है क्योंकि वर्तमान जनकपुर के बारे में कोई लोगों को इसलिए संदेह है क्योंकि वहां की इमारते काफी नई हैं। दूसरी बात ये कि रामायण अन्य विदेशी यात्रियों के विवरण से संकेत मिलता है कि मिथिला की प्राचीन राजधानी होने के पर बलिराजगढ़ का दावा काफी मजबूत है। इसके बगल से दरभंगा-लौकहा रेल लाईन भी गुजरती है और नजदीकी रेलवे हाल्ट बहहड़ा यहां से मात्र ३ किलोमीटर की दूरी पर है। इसके अगल-बगल के गांव भी ऐतिहासिक नाम लिए हुए हैं। रमणीपट्टी के बारे में लोगों की मान्यता है कि यहां राजा का रनिवास रहा होगा। फुलबरिया, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है फूलो का बाग रहा होगा। बगौल भी बिगुल से बना है जबकि कुछ ही दूरी पर नवनगर नामका गांव है। जो गरही गाँव इसके नजदीक में है। बलिराज गढ़ में हाल तक करीब ५० साल पहले तक घना जंगल हुआ करता था और पुराने स्थानीय लोग अभी भी इसे वन कहते हैं जहां पहले कभी खूंखार जानवर विचरते थे। वहां एक संत भी रहते थे जिनके शिष्य से धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने दीक्षा ली थी। कुल मिलाकर, बलिराजगढ़ अभी भी एक व्यापक खुदाई का इंतजार कर रहा है और इतिहास की कई सच्चाईयों को दुनिया के सामने खोलने के लिए बेकरार है। इस के नजदीक एक उच्च विद्यालय नवनगर में है जो इस दश किलो मिटर के अन्तर्गत एक उच्च विद्यालय है जो नवनगर में शिक्षा के लिए जाना जाता है।


आवागमन[सम्पादन करी]

सड़क मार्ग

मधुबनी बिहार के सभी मुख्य शहरों से राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ से वर्तमान में तीन राष्ट्रीय राजमार्ग तथा दो राजकीय राजमार्ग गुजरती हैं। मुजफ्फरपुर से फारबिसगंज होते हुए पूर्णिया जानेवाला राष्ट्रीय राजमार्ग ५७ मधुबनी जिला होते हुए जाती है। यह सड़क स्वर्णिम चतुर्भुज योजना का अगल चरण है जिसे ईस्ट-वेस्ट कॉरीडोर कहा जाता है। इसकी योजना वाजपेयी सरकार के वक्त बनी थी। इस सड़क के बन जाने से मधुबनी, दरभंगा बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र की ही तकदीर बदल जाएगी। इस सड़क के तहत कोसी पर बनने वाले पुल की लंबाई (संभवत:इसके साथ रेल पुल भी बनाई जाएगी) करीब २२ किलोमीटर होने की संभावना है जिसमें कोसी के पाट के अलावा उसके पूरव और पश्चिम में निचली जमीन के ऊपर कई-कई किलोमीटर तक वो पुल फैली हुई होगी। यह सड़क चार लेन की बन रही है और इसके बनने से मधुबनी का संपर्क सहरसा, सुपौल, पूर्णिया और मिथिला के पूर्वी इलाके से एक बार फिर जुड़ जाएगा जो सन १९३४ के भूंकंप से पहले कायम था। पूरा इलाका समाजिक और आर्थिक रुप से एक इकाई में बदल जाएगा। इस पुल के महज बनने मात्र से इस इलाके की राजनीतिक चेतना किस मोड़ लेगी इसका अंदाज लगाना मुश्किल है। कुछ लोगों की राय में इस पुल के बनने से एक अखिल मिथिला राज्य की मांग जोड़ पकड़ सकती है जिसका आन्दोलन अभी खंडित अवस्था में है।

मधुबनी से गुजरने वाली दूसरी सड़क ५५ किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग १०५ है जो दरभंगा को मधुबनी के जयनगर से जोड़ता है। राजधानी पटना से सड़क मार्ग के माध्‍यम से अच्‍छी तरह से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग

मधुबनी भारतीय रेल के पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्र के समस्तीपुर मंडल में पड़ता है। दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर स्थित समस्तीपुर जंक्शन से बड़ी गेज की एक लाईन मधुबनी होते हुए नेपाल सीमा पर झंझारपुर को जाती है। मधुबनी से गुजरने वाली एक अन्य रेल लाईन सकरी से घोघरडिहा होते हुए फॉरबिसगंज को जोड़ती है। १९९६ के बाद रेल अमान परिवर्तन होने से दरभंगा होते हुए दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, अमृतसर, गुवाहाटी तथा अन्य महत्वपूर्ण शहरों के लिए यहाँ से सीधी ट्रेनें उपलब्ध है। इसके अलावा एक रेललाईन दरभंगा से सकरी और झंझारपुर होते हुए लौकहा तक नेपाल की सीमा को जोड़ती है। जिले में सकरी और झंझारपुर दो रेल के जंक्शन हैं। लौकरा रेलवे लाईन के निर्माण में कांग्रेस के वरिष्ट नेता ललित नारायण मिश्र का अहम योगदान है जिनका कार्यक्षेत्र मधुबनी ही था। वे झंझारपुर से सांसद हुआ करते थे।

हवाई मार्ग

यहाँ से सबसे नजदीकी नागरिक हवाई अड्डा 146 कि॰मी॰ दूर राजधानी पटना में स्थित है। लोकनायक जयप्रकाश हवाई क्षेत्र पटना (IATA कोड- PAT) से अंतर्देशीय तथा सीमित अन्तर्राष्ट्रीय उड़ाने उपलब्ध है। इंडियन, किंगफिशर, जेट एयर, स्पाइस जेट तथा इंडिगो की उडानें दिल्ली, कोलकाता और राँची के लिए उपलब्ध हैं।

सन्दर्भ[सम्पादन करी]

  1. [१] ब्रिटैनिका इन्साक्लोपीडिया पर मधुबनी
  2. [२] विजन पत्र २०२० में मधुबनी की प्राकृतिक आपदा
  3. [३] मधुबनी जिले का विजन २०२०

एहो सभ देखी[सम्पादन करी]

बाह्य जडीसभ[सम्पादन करी]