द्रौपदी

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द्रौपदी
{{{श्रृङ्खला}}}क पात्र
पाञ्चाली
जानकारी
परिवार द्रुपद (पिता)
प्रशाती (माता)[१]
पति या पत्नी(सभ) युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुलसहदेव
बच्चा प्रतिविन्ध्य, सुतसोम, श्रुतकीर्ती, शतानीक आ श्रुतकर्मा

द्रौपदी (अङ्ग्रेजी: Draupadi) महाभारतक सबसँ प्रसिद्ध पात्रसभमे सँ एक छी । ई महाकाव्यक अनुसार द्रौपदी पाञ्चाल देशक राजा द्रुपदक पुत्री छी जे बादमे पांचो पाण्डवसभक पत्नी बनल । द्रौपदी पञ्च-कन्यासभमे सँ एक छी जकरा चिर-कुमारी कहल जाइत अछि । ई कृष्णा, यज्ञसेनी, महाभारती, सैरन्ध्री अदि अन्य नामसभ सँ सेहो विख्यात अछि । द्रौपदीक विवाह पांचो पाण्डव भाईसभ सँ भेल छल । पाण्डवसभद्वारा हिनका सँ जन्मल पांच पुत्र (क्रमशः प्रतिविन्ध्य, सुतसोम, श्रुतकीर्ती, शतानीक आ श्रुतकर्मा) उप-पाण्डव नामसँ विख्यात छल ।

द्रौपदी कऽ जन्म[सम्पादन करी]

प्राचीन भारतक महाकाव्य महाभारतक अनुसार द्रौपदी क जन्म महाराज द्रुपदद्वारा आयोजन कएल गेल यज्ञकुण्डसँ भेल छल ।[२] [३] [४][५] द्रौपदीक जन्म महाराज द्रुपदक घर यज्ञकुण्डसँ भेल छल । अतः ओ यज्ञसेनी सेहो कहायल । द्रौपदी पूर्वजन्ममे कोनो ऋषिक कन्या छल ।[६]


विवाह[सम्पादन करी]

द्रौपदी पति पावैक कामना सँ तपस्या केनए छल । शंकर प्रसन्न भऽ हुनका वर देवऽ कऽ इच्छा केलक । ओ भगवान शंकर सँ पांच बेर कहलक की ओ सर्वगुणसम्पन्न पति चाहैत अछि । शंकर कहलक की दोसर जन्ममे ओकर पांच भरतवंशी पति होइत, कियाकी ओ पति पाबैक कामना पांच बेर दोहरेने छल ।

जब पाण्डव तथा कौरव राजकुमारसभक शिक्षा पूर्ण भऽ गेल तँ ओ गुरू द्रोणाचार्यकें गुरू दक्षिणा देबऽ चाहलक । द्रोणाचार्यकें द्रुपदद्वारा कएल गेल अपन अपमानक स्मरण भऽ गेल आ ओ राजकुमासभसँ कहलक - राजकुमारसभ! यदि अहाँ गुरुदक्षिणा देबऽ चाहैत छी तँ पाञ्चाल नरेश द्रुपदकें बन्दी बनाए हमर समक्ष प्रस्तुत करी । याह अहाँ लोकनिक गुरुदक्षिणा होइत ।

गुरुदेवक ई कहलाक बाद समस्त राजकुमार अपन-अपन अस्त्र-शस्त्र लऽ पाञ्चाल देश दिस अपन डेग बढेलक । पाञ्चाल पहुँचलाक बाद अर्जुन द्रोणाचार्यसँ कहलक - गुरुदेव! अहाँ पहिने कौरवसभकें राजा द्रुपदसँ युद्ध करवाक आज्ञा दी । यदि ओ द्रुपदकें बन्दी बनेबामे असफल रहल तँ हम पाण्डव युद्ध करब ।

गुरुक आज्ञा पश्चात कौरव दिस सँ दुर्योधनक नेतृत्वमे कौरवसभ पाञ्चाल पर आक्रमण करि देलक । दुनू पक्षसभक मध्य भयङ्कर युद्ध होमए लागल मुदा अन्तमे कौरव परास्त भऽ भागि गेल । कौरवसभक पलायन भेला देख पाण्डवसभ आक्रमण आरम्भ करि देलक । भीमसेन तथा अर्जुनक पराक्रमक समक्ष पाञ्चाल नरेशक सेना हारि गेल । अर्जुन आगा जाए द्रुपदकें बन्दी बनाए लेलक आ गुरु द्रोणाचार्यक समक्ष पेश केलक ।

सन्दर्भ सामग्रीसभ[सम्पादन करी]

  1. PRASHATI DRUPADA, geni.com, मार्च ३, २०१५। 
  2. Mahasweta Devi (6 December 2012). "Draupadi". In Gayatri Chakravorty Spivak. In Other Worlds: Essays In Cultural Politics. Routledge. प॰ 251. आइएसबिएन 978-1-135-07081-6. 
  3. Alf Hiltebeitel (1 January 1991). The cult of Draupadī: Mythologies : from Gingee to Kurukserta. Motilal Banarsidass Publishe. प॰ ii. आइएसबिएन 978-81-208-1000-6. 
  4. Wendy Doniger (March 2014). On Hinduism. Oxford University Press. प॰ 533. आइएसबिएन 978-0-19-936007-9. 
  5. Devdutt Pattanaik (1 September 2000). The Goddess in India: The Five Faces of the Eternal Feminine. Inner Traditions / Bear & Co. प॰ 98. आइएसबिएन 978-1-59477-537-6. 
  6. Bhattacharya, Pradip. Five Holy Virgins, Five Sacred Myths. Manushi. http://www.manushi-india.org/pdfs_issues/PDF%20141/03%20panchakanya%204-12.pdf. 

बाह्य जडीसभ[सम्पादन करी]

एहो सभ देखी[सम्पादन करी]