हिडिम्बा

मैथिली विकिपिडियासँ, एक मुक्त विश्वकोश
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महाभारत कालमे जखन वनवास कालमे जखन पाण्डवसभक घर (लाक्षागृह) जला देल गेल तँ विदुर के परामर्श पर ओ ओही ठामसँ भागि एक दोसर वनमे गेल, जतय पीला आँईख वाला हिडिम्बा राक्षस अपन बहन हिडिम्बीक साथ रहैत छल। एक दिन हिडिम्बा अपन बहिन हिडिम्बीके वनमे भोजनक तलाश करैके लेल भेजलक मुद्दा ओही ठाम हिडिम्बा पाँच पाण्डवसभ सहित उनकर माता कुन्तिके देखलक। ई राक्षसीक भीमके देखैते हुनकासँ प्रेम भ गेल एही कारण ओ ओसभक नै मारलक जे हिडिम्बाके बहुत खराब लगल। फेरसँ क्रोधित भ हिडिम्बा पाण्डवसभ पर हमला केलक, ई युद्धमे भीम एकरा मारि देलक आ फेर ओतय जंगलमे कुन्तीक आज्ञासँ हिडिम्बी एवं भीम दुनु गोटेके विवाह भेल। हिनकर सभक घटोत्कच नामक पुत्र भेल।

विस्तृत कथा[सम्पादन करी]

लाक्षागृह के दहन के पश्चात सुरंगके रास्तासँ लाक्षागृहसँ निकलि के पाण्डव अपन माताके साथ वनके भितर चलि गेल। अनेकौं कोस चलैके कारण भीमसेनक छोडि के शेष लोग थकानसँ बेहाल भ गेल आ एक वट वृक्षके नीचा सुति गेल। माता कुन्ती प्याससँ व्याकुल छल एहीलेल भीमसेन कोनो जलाशय या सरोवरक खोजमे चलि गेल। एक जलाशय दृष्टिगत होए पर ओ पहिने स्वयम् जल पिलक आ माता तथा भाइसभक जल पिलावे के लेल लौट कर उनकर नजदिक गेल। ओ सभ थकान के कारण गहिर निन्द्रामे निमग्न भ चुकल छल अतः भीम ओही पर पहरा दै लगल।

ओही वनमे हिडिम्ब नाम के एक भयानक असुरक निवास छल। मानवसभक गन्ध मिलै पर ओ पाण्डवसभक पकैड लैके लेल अपन बहन हिडिम्बाक भेजलक ताकि ओ उनका अपन आहार बनाके अपन क्षुधा पूर्ति करि सके। ओही ठाम पर पहुँचला पर हिडिम्बा भीमसेनके पहरा दैत देखलक आ उनकर सुन्दर मुखारविन्द तथा बलिष्ठ शरीरके देखके उनका पर आसक्त भ गेल। ओ अपन राक्षसी मायासँ एक अपूर्व लावण्मयी सुन्दरीक रूप बना लेलक आ भीमसेनके नजदिक पहुँचल। भीमसेन उनकासँ पूछलक, "हे सुन्दरी! अहाँ के छी आ रात्रिमे ई भयानक वनमे अकेले किया घूम रहल छी?" भीम के प्रश्न के उत्तरमे हिडिम्बा कहलक, "हे नरश्रेष्ठ! हम हिडिम्बा नामक राक्षसी छी। हमर भाई हमरा अहाँसभके पकडिके लावे के लेल भेजने अछी मुद्दा हमर हृदय अहाँ पर आसक्त भ गेल अछी तथा हम अहाँके अपन पति के रूपमे प्राप्त करैके लेल चाहै छी। हमर भाई हिडिम्ब बहुत दुष्ट आ क्रूर अछी किन्तु हम एतेक सामर्थ्य रखने छी कि अहाँके ओकर चंगुलसँ बचाके सुरक्षित स्थान धरि पहुँचा सकै छी।"